निसिदिन बरसत नैन हमारे…जयंती पर महाकवि सूरदास को किया याद
अयोध्या कुंज खेरिया मोड पर मनाई गई सूर जयंती
आगरा। अयोध्या कुंज खेरिया मोड पर मंगलवार को महाकवि सूरदास जी की जयंती मनाई गई। कवियों और साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं के जरिए सूरदास जी को याद किया। इस दौरान सूरदास जी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर भी प्रकाश डाला गया।
सूर जयंती पर आयोजित संगोष्ठी का शुभारंभ पूजा तोमर की सरस्वती वंदना से हुआ। संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए नोएडा से आए सुप्रसिद्ध नाटककर्मी तरुण कुमार घोष ने कहाकि सूर को जन्मान्ध मानना मुश्किल है, क्योंकि उन्होंने जिस सूक्ष्मता से कृष्ण और राधा के रूप का श्रंृगारिक वर्णन किया है वह किसी जन्मांध के लिए संभव नहीं है। प्रो. आन्शवना सक्सेना ने सूर का पद निसिदिन बरसत नैन हमारे प्रस्तुत किया। पूजा तोमर ने मधुकर श्याम हमारे चोर पद की संगीतमयी प्रस्तुति दी। सुशील सरित ने सबसे ऊंची प्रेम सगाई पद को सुनाया। हरीश अग्रवाल ढ़पोर शंख ने सूर के काव्य पर अपना दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए कहाकि उनके पद जीवन के यथार्थ का वर्णन करते हैं और बाल स्वरूप की जो उन्होंने प्रस्तुति दी है वह अन्यत्र नहीं मिलती। चंद्रशेखर शर्मा ने कहाकि सूर ने जो कहा वह भी कविता थी, जीवन की सविता थी, लेकिन आज कविता चैराहों पर झुलस रही है, क्योंकि वह मन में नहीं बस यही है। दिव्यांशी, डॉ. रमेश आनंद, डॉ. नीरज स्वरूप डॉ. निमिषा, नीलू श्रीवास्तव आदि ने भी सूरदास जी कृतित्व पर प्रकाश डाला। धन्यवाद लवेश ने और संचालन सुशील सरित ने किया।
