जिला उपभोक्ता आयोग का फैसलाः चोला मंडलम चुकाए हर्जाने सहित इलाज का बिल

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आयोग ने बीमा कम्पनी को माना सेवा में कमी का दोषी

इलाज में खर्च हुई राशि के साथ हर्जाना भी देना होगा

कंपनी द्वारा जमा की डीडी आयोग ने परिवादी को सौंपी

आगरा। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग प्रथम ने एक अहम फैसले में चोला मंडलम इंश्योरेंस कंपनी को उपभोक्ता सेवा में लापरवाही बरतने का दोषी ठहराते हुए उपभोक्ता को पूरी बीमा राशि ब्याज सहित अदा करने के आदेश किए। साथ ही मानसिक प्रताडना और वाद व्यय के रूप में बीमा कम्पनी पर दस हजार रुपये का हर्जाना भी लगाया। यह फैसला आयोग के अध्यक्ष सर्वेश कुमार सदस्य राजीव सिंह की बेंच ने सुनाया।

दरअसल, बाग फरजाना सिविल लाइंस निवासी अनुराग अग्रवाल ने सेन्ट्रल बैंक आॅफ इंडिया से ग्रुप पाॅलिसी 23 जुलाई 2019 को खरीदी जिसकी प्रीमियम राशि 16 हजार 697 रुपये उपभोक्ता ने अदा किए। ग्रुप पाॅलिसी में उपभोक्ता, उसकी पत्नी और माता-पिता का चिकित्सकीय बीमा आच्छादित था। उपभोक्ता ने 23 जुलाई 2020 को प्रीमियम का भुगतान कर पाॅलिसी का नवीनीकरण कराया जो 22 जुलाई 2021 तक था। इसी बीच 23 सितम्बर 2020 को खांसी, जुखाम, बुखार और सांस लेने की परेशानी पर उपभोक्ता ने चिकित्सक की सलाह पर एसएन मेडिकल काॅलेज में कोविड-19 की आरटी-पीसीआर कराई जिसकी जांच पाॅजीटिव आई। खून की जांच में प्लेटलेट्स कम आईं। चिकित्सक की सलाह पर 30 सितम्बर 2021 को परिवाद प्रभा हाॅस्पिटल में भर्ती हुआ। जहां उसे जम्बो पैक चढाया गया। तीन दिन अस्पताल में भर्ती रहने के बाद परिवादी का घर में आइसोलेसन में रहते हुए इलाज चला। इस दौरान इलाज में 99 हजार 335 रुपये खर्च आया था। परिवादी ने 27 अक्टूबर 2020 को बीमा कम्पनी चोलामंडलम में क्लेम को लेकर सभी दस्ता वेज पेश किए तो कम्पनी ने उनके दावे को खारिज कर दिया। परिवादी के विधिक नोटिस के बाद भी बीमा कम्पनी ने कोई जवाब नहीं दिया। इस पर परिवादी ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से जिला उपभोक्ता आयोग में प्रकरण दर्ज कराया। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग प्रथम के अध्यक्ष सर्वेश कुमार और सदस्य राजीव सिंह की संयुक्त बेंच ने मामले की सुनवाई की। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आयोग ने पाया कि चोला मंडलम जनरल इंश्योरेंस कंपनी ने बीमा दावा न देकर सेवा में कमी की है। आयोग ने आदेश किए बीमा कम्पनी अनुराग अग्रवाल के इलाज में खर्च हुई क्षतिपूर्ति राशि 99 हजार 335 रुपये का भुगतान 27 नवम्बर 2020 से 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से 45 दिन के अंदर अदा करे। ऐसा न करने की स्थिति में ब्याज दर 9 फीसद देय होगी। इसके अलावा परिवादी को इस दौरान हुई मानसिक वेदना की क्षतिपूर्ति के लिए 5 हजार रूपए वाद व्यय के रूप 5 हजार रूपए हर्जाना भी अदा करे।
बीमा कम्पनी की ओर से आयोग में डीडी के माध्यम से जमा कराए गए एक लाख अडतिस हजार इक्तालिस रुपये का चेक को आयोग के अध्यक्ष सर्वेश कुमार और सदस्य राजीव सिंह ने परिवादी को सौंपा।

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