कांग्रेस ने नई श्रमिक संहिताओं को बताया मजदूर विरोधी, तत्काल वापस लेने की मांग

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नयी दिल्ली। श्रम सुधारों के नाम पर सरकार हाल में द्वारा लाई गई नयी श्रम संहिताओं को कांग्रेस ने श्रमिकों के खिलाफ बताते हुए इन्हें तत्काल वापस लिया जाने की मांग की। असंगठित श्रमिक और कर्मचारी कांग्रेस के अध्यक्ष डाॅ. उदित राज ने गुरुवार को यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में कहाकि मोदी सरकार द्वारा लाई नयी श्रमिक संहिताओं का कांग्रेस विरोध करती है। सरकार को इसे वापस लेना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इन संहिताओं को वापस नहीं लिया जाता है तो उनका संगठन पूरे देश में इनके खिलाफ आंदोलन करेगा।

उन्होंने कहाकि असंगठित श्रमिक और कर्मचारी कांग्रेस ने 22 नवंबर को यहां श्रम शक्ति भवन पर प्रदर्शन कर इसका विरोध करते हुए सरकार से मांग की थी कि इन सभी श्रमिक संहिताओं को तत्काल वापस लिया जाए। ये सभी श्रमिक संहिताएं मजदूर विरोधी हैं और इन चारों लेबर कोड्स-औद्योगिक संबंध संहिता- 2020, व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य संहिता- 2020, सामाजिक सुरक्षा संहिता- 2020 और वेतन संहिता 2019 कारपोरेट की हितैषी और मजदूर विरोधी है। श्रमिकों के लिए घातक ये संहिताएं उनके अधिकारों को छीनती हैं, नौकरी की सुरक्षा खत्म करती हैं और उद्योगपतियों का हित साधती हैं।

कांग्रेस नेता ने कहाकि देश में पहले व्यावसायिक और स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर सख्त कानून थे, लेकिन अब निरीक्षण सिस्टम को ध्वस्त कर एक बेहद ढीला ढांचा तैयार किया गया है। नयी श्रमिक संहिताओं में निरीक्षण सिस्टम को कमजोर करने से मजदूरों के शोषण की संभावनाएं बढ़ गईं और मालिकों को बहुत सारी कानूनी पाबंदियों से छूट मिल जाएगी

उन्होंने कहाकि इन नयी संहिताओं में अस्थायी कर्मचारियों की अनदेखी हुई है और उनको केवल पंजीकरण तक सीमित कर दिया गया है। इसमें उनके लिए ईएसआईसी और ईपीएफओ का प्रावधान नहीं हैं। हायर एंड फायर नीति को ताकत दी गई है, जिससे असंगठित मजदूरों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा और उनकी नौकरी की सुरक्षा खत्म होगी। उनका यह भी कहना था कि इन चारों लेबर कोड में श्रमिकों के अधिकार खत्म कर दिए गए हैं। शोषण के खिलाफ मजदूर हड़ताल नहीं कर सकते और इन संहिताओं से बंधुआ मजदूर की कुरीति को बल मिलेगा। कांग्रेस नेता कहाकि इन संहिताओं में श्रमिकों के हितों को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया है और श्रमिकों के सारे अधिकार छीन लिये गये हैं इसलिए सरकार को इन सभी संहिताओं को तत्काल वापस लेना चाहिए।

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