आगरा जलकल विभाग में पाइपलाइन घोटाला, महाप्रबंधक के वित्तीय अधिकार सीज

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आगरा। जलकल विभाग में पाइप लाइन में लीकेज और नई लाइन बिछाने में हुए खेल की फाइलों को अधिकारी दबा गए हैं। नगरायुक्त अंकित खंडेलवाल और चार सदस्यीय जांच कमेटी के आदेश के बाद भी आधा दर्जन फाइलें नहीं दी गईं। यहां तक कि कमेटी के समक्ष महाप्रबंधक एके राजपूत उपस्थित ही नहीं हुए। नगरायुक्त ने निदेशक स्थानीय निकाय को महाप्रबंधक के वित्तीय अधिकार सीज करने और अनुशासनात्मक कार्रवाई की रिपोर्ट भेजी है।

जलकल विभाग द्वारा शहर में जलापूर्ति की जाती है। 1600 किमी लंबी पाइप लाइनों की मरम्मत और नई लाइन बिछाने का कार्य विभाग के पास है। विभाग में 4.30 करोड़ रुपये का खेल हुआ है। इसकी शिकायतें दिसंबर 2025 से की जा रही हैं। एक भी शिकायत की जांच महाप्रबंधक एके राजपूत ने नहीं कराई। शिकायतों को फर्जी बताते हुए रिपोर्ट लगा दी है। नगरायुक्त अंकित खंडेलवाल के आदेश पर अपर नगरायुक्त शिशिर कुमार की निगरानी में गठित कमेटी ने जांच की।
जांच में शिकायतों से संबंधित फाइलें नहीं उपलब्ध कराई गईं। यहां तक विभागीय कर्मचारियों को बचाने का भी प्रयास किया गया। उनकी फाइलों को दबा दिया गया। जिस पर नगरायुक्त ने महाप्रबंधक के वित्तीय अधिकार सीज करते हुए कार्रवाई की संस्तुति की है।
विभागीय अधिकारी मरम्मत और नई लाइन बिछाने में खेल किया है। पांच-पांच लाख रुपये से कम की फाइलें तैयार कर 80 लाख रुपये के स्लूज वाल्व की खरीद की गई। एक ही तारीख में 40 लाख रुपये के वाल्व दिखाकर 5-5 लाख रुपये की फाइलों से भुगतान किया गया। पाइपलाइन मरम्मत और नई लाइन बिछाने में करीब 1 करोड़ रुपये के भुगतान का हुआ पर इनका सत्यापन नहीं किया गया। रेन वाटर हार्वेस्टिंग में करीब 2.5 करोड़ रुपये का गोलमाल हुआ। विभाग में केवल निर्माण कार्य ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर भी अनियमितताओं की लंबी सूची सामने आई। सेवानिवृत्त सहायक अभियंता राजकुमार शर्मा को 18 वर्ष बाद भी पेंशन व बकाया भुगतान नहीं हुआ। मृतक आश्रित भर्ती में रजनीश शर्मा, चरणजीत और ललित दक्ष के प्रमोशन पर जांच कमेटी ने सवाल उठाये हैं। सुमित पचैरी की नियुक्ति की फाइल गायब, फिर भी जेई के रूप में कार्य कर रहे हैं।

हन्ना गली छीपीटोला के कैलाश चंद्र ने 31 दिसंबर 2025 को जलकल विभाग के अधिकारियों के खिलाफ शिकायत की। कैलाश ने अपनी शिकायत में कहा कि चमरौली क्षेत्र में पाइप लाइन बिछाने में खेल हुआ है। चार से पांच फाइलें तैयार कर 20 लाख रुपये से अधिक का भुगतान हो गया। एक बार भी भुगतान का विभागीय अधिकारियों ने सत्यापन नहीं किया। निदेशक नगरीय निकाय से चार दिसंबर 2025 को जलकल विभाग में मृतक आश्रित पद पर हुई सुमित पचैरी की रिपोर्ट मांगी। किस तरीके से सुमित से जूनियर इंजीनियर के रूप में कार्य लिया जा रहा है। जांच कमेटी ने दो से तीन बार जलकल महाप्रबंधक से फाइल तलब की। मगर, फाइल नहीं भेजी गई। न ही इसका कोई भी जवाब दिया गया। सुमित के खिलाफ कई और भी शिकायतों की जांच चल रही है।
जलकल विभाग की महिला कर्मचारी राधा रानी ने मृतक आश्रित पद पर भर्ती हुए लिपिक रजनीश शर्मा, चरनजीत, ललित दक्ष के खिलाफ शिकायत की। तीनों ही कर्मचारी टंकण परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर सके। इसके बाद भी इनका प्रमोशन किया जा रहा है। कमेटी ने तीन से चार बार पत्र लिखे लेकिन तीनों कर्मचारियों की फाइलें उपलब्ध नहीं कराई गईं।

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