बीमा कम्पनी देना होगा इलाज खर्च 2.39 लाख के साथ हर्जाना भी
जिला उपभोक्ता प्रतितोष आयोग गु्रप हेल्थ बीमा पर सुनाया फैसला
45 दिन के अंदर ब्याज सहित उपभोक्ता को किया जाए भुगतान
आगरा। एक उपभोक्ता को अपनी पत्नी के इलाज का खर्च नहीं मिलने पर बीमा कंपनी और बैंक के खिलाफ उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाना पड़ा। जिला उपभोक्ता आयोग ने सुनवाई के बाद बीमा कंपनी और बैंक को उपभोक्ता को इलाज में व्यय 2.39 लाख रुपये ब्याज सहित देने का आदेश दिया है। साथ ही मानसिक पीडा और वाद व्यय के रूप 15 हजार रुपये का हर्जाना लगाया है। बैंक की ओर से 1.62 लाख का भुगतान चेक द्वारा किया गया। जिसे आयोग ने उपभोक्ता को सौंप दिया गया।
अमृतपुरी बुंदू कटरा निवासी एचबीएस यादव केनरा बैंक सेवानिवृत हैं। उन्होंने सेवा निवृत बैंक कर्मचारियों के लिए संचालित अपना व अपनी पत्नी ग्रुप हेल्थ बीमा कराया था। एक जनवरी 2016 से लेकर 31 अक्टूबर 2019 तक उनके खाते से प्रीमियम राशि की कटौतियां की गईं। बीमा अवधि के दौरान उनकी पत्नी श्रीदेवी यादव को बीमार होने अग्रसेन हाॅस्पिटल नई दिल्ली में भर्ती कराया गया। इलाज में 2 लाख 39 हजार 534 रुपये खर्च आया। जब उपभोक्ता ने बीमा कंपनी से क्लेम के तहत राशि की मांग की तो कोई सुनवाई नहीं की गई। लोकपाल में शिकायत के बाद भी भुगतान नहीं होने पर उपभोक्ता ने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग प्रथम के अध्यक्ष सर्वेश कुमार और सदस्य राजीव सिंह की कोर्ट ने दोनों पक्षों के विद्वान अधिवक्ताओं के तर्क सुनने के बाद बीमा कम्पनी और उसके पक्षकारों की सेवा में कमी मानते हुए उपभोक्ता के पक्ष में निर्णय सुनाते हुए बीमा कंपनी को इलाज में हुए खर्च हुई रकम दो लाख 39 हजार 534 रुपये की भरपाई 2 दिसम्बर 2020 से भुगतान की तारीख तक छह प्रतिशत ब्याज के साथ 45 दिन के अंदर अदा करने के आदेश दिए। साथ ही मानसिक क्षति के रूप में दस हजार और वाद व्यय के लिए पांच हजार रुपये हर्जाना भी लगाया। उक्त अवधि में भुगतान न करने पर परिवादी 9 फीसद ब्याज का हकदार होगा। कोर्ट के आदेश पर बैंक की ओर से अपने हिस्से के एक लाख 62 हजार 5 सौ रुपये का चेक आयोग में जमा कराया, जिसे उपभोक्ता को सौंप दिया गया। जबकि बीमा पर इस सम्बन्ध में आगे की कार्रवाई की जा रही है। उपभोक्ता की ओर से पैरवी विद्वान अधिवक्ता पुष्पेन्द्र कुमार शर्मा ने की।
