ऑपरेशन के बाद खराब हुई आंख, डॉक्टर को चुकाना पडा हर्जाना
आगरा के प्रतिष्ठित डॉक्टर द्वारा मोतियाबिंद ऑपरेशन में पाए लापरवाही के दोषी
जिला उपभोक्ता फोरम प्रथम का फैसला राष्ट्रीय उपभोक्ता अदालत में भी रहा कायम
डाॅक्टर ने जमा कराया 2.28 लाख रुपये का चेक, फोरम ने पीडित के पुत्र को सौंपा
आगरा। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग प्रथम ने मोतियाबिंद के ऑपरेशन में लापरवाही करने पर आगरा के प्रतिष्ठित डॉक्टर को सेवा में कमी का दोषी करार दिया। ं आगरा उपभोक्ता अदालत प्रथम का फैसला राष्ट्रीय उपभोक्ता अदालत में भी कायम रहा। वर्ष 2003 के इस मामले में चिकित्सक की ओर से प्रदान किए गए 2 लाख 28 हजार 375 रुपये का चेक परिवादी के पुत्र को सौंपा। इसमें ब्याज भी शामिल है।
यह मामला वर्ष 2003 का है, जिसमें परिवादी जोगिंदर सिंह (अब मृतक) ने डॉ. अशोक पचैरी और लेजर साइट (इंडिया) प्रा. लि. के विरुद्ध शिकायत दर्ज कराई थी। परिवादी जोगिंदर सिंह ने अपनी बाईं आंख के मोतियाबिंद का ऑपरेशन डॉ. अशोक पचैरी से कराया था। ऑपरेशन के बाद आंख की रोशनी बढ़ने के बजाय और कम हो गई। बताया गया कि ऑपरेशन के दौरान कॉर्नियल डीकंपेंसेशन और लेन्स के सही ढंग से फिट न होने जैसी गंभीर जटिलताएं पैदा हो गई थीं। आयोग ने साक्ष्यों के आधार पर पाया कि डॉक्टर ने ऑपरेशन के दौरान लापरवाही बरती।
जिला उपभोक्ता आयोग ने विपक्षी को आदेश दिया था कि परिवादी को सेवा में कमी और उपचार के खर्चों के मद में 1,05,000 रुपये की धनराशि का भुगतान किया जाए। निर्धारित अवधि में भुगतान न करने पर इस राशि पर 6ः वार्षिक ब्याज भी देय थी। इस निर्णय के खिलाफ डॉक्टर ने राज्य उपभोक्ता आयोग और राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग में अपील की थी। राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग ने जनवरी 2026 के अपने आदेश में डॉक्टर की याचिका को अत्यधिक देरी के आधार पर खारिज कर दिया, जिससे जिला आयोग का फैसला और मुआवजे का भुगतान अंतिम रूप से प्रभावी हो गया।
इस आदेश के अनुपालन में, जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम प्रथम आगरा द्वारा परिवादी को भुगतान सुनिश्चित किया गया। आयोग के अध्यक्ष सर्वेश कुमार और सदस्य राजीव सिंह ने परिवादी स्वर्गीय जोगिंदर सिंह के पुत्र अजय पाल सिंह को 2,28,375 रुपये की राशि का एक चेक पंजाब नेशनल बैंक 9 अप्रैल 2026 को सौंपा गया। इस धनराशि में मूल डिक्री की धनराशि और उस पर लगा ब्याज भी शामिल है।
