गाय को संपत्ति नहीं माता माना जाएः अविमुक्तेश्वरानंद
गोरक्षा को लेकर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का सरकार पर तंज
लखनऊ के लिए शुरू की यात्रा, 11 को करेंगे राजधानी में बडा शंखनाद
वाराणसी। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गोरक्षा के मुद्दे को लेकर प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला है। शनिवार को उन्होंने कहाकि आज का राजा गाय को माता नहीं मान रहा है, बल्कि उसे संपत्ति के रूप में देखने लगा है। ऐसे में उसे ललकारना आवश्यक हो गया है। ज्योर्तिमठ पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने शनिवार को वाराणसी से लखनऊ के लिए अपनी यात्रा की शुरुआत की। उन्होंने कहाकि 11 मार्च को लखनऊ पहुंचकर गोरक्षा अभियान का बड़ा शंखनाद किया जाएगा।
यात्रा के दौरान शंकराचार्य जौनपुर पहुंचे, जहां उन्होंने गोमती नदी के तट पर स्थित जमैथा गांव में महर्षि यमदग्नि मुनि के आश्रम में दर्शन-पूजन किया। इस दौरान उन्होंने कहाकि यह भूमि महर्षि यमदग्नि और भगवान परशुराम की तपोभूमि रही है।यहां सदियों से गाय की सेवा और संरक्षण की परंपरा रही है।
शंकराचार्य ने कहाकि प्राचीन काल में एक राजा ने जबरन महर्षि यमदग्नि की गाय छीन ली थी। जब यह बात उनके पुत्र भगवान परशुराम को पता चली तो उन्होंने अन्याय के खिलाफ खड़े होकर राजा और उसकी सेना को पराजित कर गाय को वापस लिया था। उन्होंने कहाकि यह प्रसंग अन्याय के खिलाफ संघर्ष का प्रतीक है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहाकि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा में गाय को माता के समान माना जाता है। यदि शासन व्यवस्था उसे केवल संपत्ति के रूप में देखेगी तो यह आस्था और परंपरा का अपमान होगा। इसलिए संत समाज इस मुद्दे पर आवाज उठाने के लिए बाध्य है।
