भारत में रसोई गैस इमरजेंसी लागू, सरकार का तेल कंपनियों को प्रोडक्शन बढ़ाने का आदेश

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ईरान-इजराइल जंग लम्बी खिंची तो होती किल्लत

नई दिल्ली। ईरान-इजराइल जंग अगर बढ़ी तो भारत में रसोई गैस की किल्लत भी बढ़ सकती है। इस स्थिति को देखते हुए सरकार ने इमरजेंसी पावर इस्तेमाल करते हुए देश की सभी ऑयल रिफाइनरी कंपनियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का आदेश दिया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव से सप्लाई चेन में रुकावट आ सकती है। इससे गैस की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। इसी खतरे को देखते हुए सरकार ने 5 मार्च को देर रात ये आदेश जारी किया।

आदेश में कहा गया है कि अब रिफाइनरियां अपने पास मौजूद प्रोपेन और ब्यूटेन का इस्तेमाल सिर्फ रसोई गैस बनाने के लिए करेंगी। इन गैसों का उपयोग किसी और काम में नहीं किया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने कहाकि हमारे पास ऊर्जा के इतने सोर्स हैं कि हम सिर्फ होर्मुज रूट के भरोसे नहीं हैं। कच्चे तेल, पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स और एलपीजी के मामले में हम काफी अच्छी स्थिति में हैं। हमारे पास अभी पर्याप्त स्टॉक है, चिंता की बात नहीं है। हम दुनिया के दूसरे हिस्सों से सप्लाई बढ़ा रहे हैं ताकि होर्मुज के रास्ते होने वाली सप्लाई की कमी को पूरा किया जा सके।

हम 2022 से रूस से कच्चा तेल खरीद रहे हैं। 2022 में हम अपनी जरूरत का सिर्फ 0.2 प्रतिशत तेल रूस से मंगाते थे। वहीं इस साल फरवरी में हमारी कुल जरूरत का 20 प्रतिशत हिस्सा रूस से आया है। फरवरी में भारत ने रूस से हर दिन 10.4 लाख बैरल कच्चा तेल इम्पोर्ट किया है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी इम्पोर्टर देश है। एमआपीएल रिफाइनरी बंद होने की खबरें गलत हैं। रिफाइनरी के पास तेल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।

आदेश के मुताबिक, सभी कंपनियों को प्रोपेन और ब्यूटेन की सप्लाई सरकारी तेल कंपनियों- इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी), हिंदुस्तान पेट्रोलियम (एचपी) और भारत पेट्रोलियम (बीएचपी) को करनी होगी। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि देश के लगभग 33.2 करोड़ एक्टिव कंज्यूमर्स यानी उपभोक्ताओं को बिना किसी रुकावट के गैस सिलेंडर मिलते रहें।

 

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