रेनबो आईवीएफ में देश-विदेश के डॉक्टरों को दी गई ट्रेनिंग
दो दिवसीय एडवांस हैंड्स ऑन वर्कशॉप में बांझपन के इलाज की नई तकनीक रूबरू हुए चिकित्सक
आगरा। रेनबो आईवीएफ में हुई दो दिवसीय एडवांस हैंड्स ऑन वर्कशॉप में नेपाल और देशभर से आए 15 डॉक्टरों ने रजिस्ट्रेशन कराया। इस कार्यशाला में डॉक्टरों को सिम्युलेटर (मशीनों) पर अभ्यास कराकर बांझपन के इलाज की नई तकनीकों की जानकारी दी गई। पहले दिन एआरटी प्रोसीजर और भ्रूण विज्ञान पर फोकस रहा। उजाला सिग्नस रेनबो हॉस्पिटल के एमडी और स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. नरेंद्र मल्होत्रा ने ओवम पिकअप प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बताया।
उन्होंने प्रोब एंड द स्कोप- हिस्टेरोस्कोपी और लैप्रोस्कोपी ओरिएंटेशन पर व्याख्यान देते हुए कहाकि इन तकनीकों की मदद से बिना चीर-फाड़ के गर्भाशय और फैलोपियन ट्यूब की अंदरूनी जांच की जाती है। यह निःसंतानता के कारणों का पता लगाने में मील का पत्थर साबित हो रही हैं। रेनबो आईवीएफ की एमडी और बांझपन एक्सपर्ट डॉ. जयदीप मल्होत्रा ने भ्रूण स्थानांतरण (एंब्रो ट्रांसफर) की बारीकियां सिखाईं। हैंड्स ऑन ओपीयू एंड ईटी सिम्युलेटर पर प्रशिक्षण देते हुए बताया कि किस प्रकार सही तकनीक से भ्रूण को गर्भाशय में रखा जाए। ताकि सफलता दर बढ़ सके। उन्होंने एंडोमेट्रियोसिस की डायग्नोसिस एंड प्रैक्टिकल मैनेजमेंट विषय पर कहाकि एंडोमेट्रियोसिस महिलाओं में बांझपन का एक बड़ा कारण है। समय रहते इसकी पहचान और लेप्रोस्कोपी से इलाज कर प्राकृतिक गर्भधारण की संभावना बढ़ाई जा सकती है।
डॉ. केशव मल्होत्रा ने एंब्रोलाॅजी फाॅर क्लीनिक्स विषय पर जानकारी देते हुए बताया कि आधुनिक प्रयोगशाला में भ्रूणों को विकसित करने और उनकी गुणवत्ता जांचने के तरीके लगातार बदल रहे हैं। टाइम-लैप्स तकनीक से हर पल भू्रण पर नजर रखी जा सकती है, जिससे सबसे स्वस्थ भ्रूण का चयन संभव हो पाता है। दूसरे दिन अल्ट्रासाउंड और एंडोस्कोपी पर कार्यशाला हुई। स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. निहारिका मल्होत्रा ने टीवीएस अल्ट्रासाउंड इन इनफर्टिलिटी विषय पर प्रशिक्षण देते हुए कहाकि ट्रांसवजाइनल सोनोग्राफी आज बांझपन की जांच की रीढ़ है। इससे अंडाशय, अंडाणु और गर्भाशय की परत की सटीक जानकारी मिलती है, जिससे इलाज की सही दिशा तय होती है।
इस कार्यशाला का उद्देश्य डॉक्टरों को सैद्धांतिक जानकारी के साथ-साथ व्यावहारिक अभ्यास कराना था, ताकि वे अपने अस्पतालों में जाकर मरीजों को बेहतर इलाज दे सकें। सभी प्रतिभागी डॉक्टरों ने इस आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह की हैंड्स ऑन ट्रेनिंग से उनके कौशल में निखार आया है और वे नई तकनीकों को आत्मविश्वास के साथ अपना सकेंगे।
