भारत आज कृषि प्रधान से कुर्सी प्रधान देश हो गयाः शंकराचार्य

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कहा, जो न नूतन है न पुरातन, जो सृष्टि के साथ आया वो है सनातन

शंकराचार्य ने कहा, सनातन के विशाक्त रक्त को है शोधन की जरूरत

आगरा। शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज ने कहाकि भारत के संविधान में भले ही हिन्दू राष्ट्र न हो, लेकिन सनातन सृष्टि के प्रारंभ से ही भारत हिन्दू राष्ट्र है। बुधवार को आगरा आए स्वामी राज राजेश्वराश्रम जयपुर हाउस स्थित सुमित ढल के निवास पर पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। वे 15 जनवरी को पुनर्निर्मित माधव भवन का उद्घाटन करने के लिए आगरा आए हैं।

उन्होंने कहाकि जो न नूतन है न पुरातन, जो सृष्टि के साथ आया वो है सनातन। भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाए जाने के सवाल पर कहाकि बनाया उसे जाता है जो हो न। भारत हिन्दू राष्ट्र कब नहीं था। भारत के संविधान में भले ही हिन्दू राष्ट्र न हो, लेकिन सनातन सृष्टि के प्रारम्भ से है। उन्होंने कहाकि जो लोग भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने की बात करते हैं उनकी भावना अच्छी है, लेकिन शब्द प्रयोग ठीक नहीं है। उन्होंने कहाकि संविधान बहुत छोटी चीज है, जो बनती बिगड़ती है। हिन्दू राष्ट्र बनाने की बात पर राष्ट्र के प्रति प्रेम कम अपने राजनीतिक एजेन्डे और अपनी कुर्सी को बनाए रखने का दृष्टिकोण अधिक है।

जगदगुरु ने कहाकि संविधान सिर्फ व्यवस्था का नाम है जो बनते बिगड़ते रहते हैं। संविधान कोई बहुत बड़ी समस्या नहीं है। जिन्हें चुनकर भेजा है उनकी जिम्मेदारी है संविधान को ठीक करना। ओवैशी के बुर्का पहनकर भी महिला प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठ सकती है के सवाल पर कहाकि लोकतंत्र है। गधा भी प्रधानमंत्री बन सकता है। जब ज्यादा पशु इकट्ठे हो जाएंगे तो उनका प्रतिनिधि बन जाएगा। मनुष्य भी एक पशु ही है।

किसी भी संकट में हिन्दू एकजुट क्यों होता है के सवाल पर कहाकि हमारा सनातन धर्म का रक्त शुद्ध नहीं रहा। विशाक्त हो चुका है। जब शरीर का रक्त विशाक्त हो जाता है तो फोड़े फुंसी, कई प्रकार की बीमारी उत्पन्न हो जाती हैं। आज सनातन के विशाक्त रक्त को शोधन की आवश्यकता है। उन्होंने कहाकि जो सनातन धर्मावलम्बी हैं, वो गर्व से कहें कि हम सनातनी हैं। कोई जैन, कोई बौद्ध कोई सिक्ख बना है। जब तक रक्त शोधन नहीं होगा तब तक बंगला देश की तरह विश्व में यही चलता रहेगा। उन्होंने कहाकि विश्व की समस्याओं का समाधन सनातन का रक्त शोधन से ही होगा। सनातम धर्म के रक्त में आए दोष का शोधन जरूरी है।

जगद्गुरु ने कहाकि सनातन रक्त का शोधन सत्ता प्राप्ति से नहीं होगा। सत्ता का चाल, चरित्र चेहरा एक होता है। जो कुर्सी पर बैठता है वह वोट गिनता है। सनातन धर्म के संस्कारित, संगठित होने से रक्त शोधन होगा। सनातन धर्म को सत्ता की जरूरत नहीं है। सत्ता धर्म के सामने झुकती है। सत्ता में दोष ही दोष हैं। सनातन को संस्कारित और संगठित करने का काम करने के लिए संघ की तरह अनेक संगठन काम कर रहे हैं। उनकी क्रियाशीलता बढ़नी चाहिए। जगद्गुरु ने कहाकि हम दीन हीन न बनं।े सनातन के स्वाभिमान को लेकर आगे बढ़ें। सत्ता सनातन के समाने झुकती है, लेकिन लगता है भारत कृषि प्रधान से आज कुर्सी प्रधान देश हो गया। सत्ता का लोभ और ललक आज अल्पसंख्यकों से अधिक बहुसंख्यकों को है। वो अल्पसंख्यक होते हुए भी अपने संगठन के काम में लगे हैं। बहुसंख्यकों को सत्ता चाहिए, जिसके लिए तुष्टीकरण, फिर वोटों को जोड़ना। इस मौके पर शंकाराचार्य के गमन पर उनका आरती और पुष्प वर्षा कर वेदोंच्चारण के साथ स्वागत किया गया। इस मौके पर सुमित ढल, संदीप ढल, जलदीप कपूर, विजय सामा, विजय गोयल आदि मौजूद रहे।

 

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