राहुल गांधी ने बीच में टोका तो भड़के अमित शाह, बोले-संसद आपकी मर्जी के मुताबिक नहीं चलेगी

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राहुल का शाह को डिबेट का चैलेंज, गृहमंत्री बोले, मैं तय करूंगा, मुझे क्या बोलना है

नई दिल्ली। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बुधवार को लोकसभा में चुनाव सुधार पर चर्चा का जवाब दिया। उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत में कहाकि चुनाव सुधार पर चर्चा से भाजपा के लोग भागते नहीं है। इस पर सदन में विपक्ष के नेता राहुल गांधी अपनी सीट से खड़े हुए और शाह से कहाकि मैं एसआईआर पर अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस पर डिबेट के लिए आपको चैलेंज करता हूं। इस दौरान दोनों के बीच तीखी बहस भी हुई।

शाह ने डेढघंटे के भाषण में चुनाव सुधार, इवीएम, मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति, नेहरू, इंदिरा, पश्चिम बंगाल, बांग्लादेशियों की घुसपैठ और कांग्रेस की वोट चोरी का जिक्र किया। उन्होंने राहुल गांधी के लोकसभा में पूछे 3 सवालों का जवाब भी दिया। इस दौरान सदन में कई बार हंगामा हुआ। आखिर में कांग्रेस ने सदन से वॉक आउट कर दिया।

अमित शाह ने कहाकि विपक्ष के नेता राहुल गांधी की तीनों प्रेस कॉन्फ्रेंस का जवाब मैं दूंगा। एक सादी वाली, एक एटम बम वाली और एक हाइड्रोजन बम वाली। हर सवाल का जवाब दूंगा। राहुल गांधी ने उन्हें बीच में टोका। इस पर राहुल गांधी ने कहा कि शाह जी मैं आपको चैलेंज करता हूं। आप मेरी वोट चोरी की तीनों प्रेस कॉन्फ्रेंस पर चर्चां करें। इस पर शाह ने कहाकि मैं 30 साल से संसद या विधान सभा में चुनकर आ रहा हूं। ऐसा कभी नहीं हुआ। मेरे बोलने का क्रम मैं तय करूंगा। आप नहीं। इस पर राहुल ने कहा शाह जी का रिस्पांस पूरी तरह से घबराया हुआ है। डरा हुआ रिस्पांस है। इस पर शाह बोले, मैं उनके उकसावे पर नहीं आऊंगा। विषय पर बोलूंगा। मेरे भाषण में पहले-बाद में जो बोलना है मैं तय करूंगा। हमने तो नहीं कहाकि नेता विपक्ष झूठा बोल रहे हैं।

गृहमंत्री ने राहुल के 3 सवालों का दिया जवाब

1. राहुल का सवालः चुनाव आयुक्त की नियुक्ति से सीजेआई को क्यों हटाया गया।

शाह का जवाबः 73 साल तक चुनाव आयोग कि नियुक्ति का कानून नहीं था। पीएम सीधे नियुक्ति करते थे। अभी तक जितने चुनाव आयुक्त हुए सभी ऐसे ही हुए हैं। 1950-1979 तक प्रधानमंत्री ने ही चुनाव आयुक्त की नियुक्ति की। 1979-91 तक चुनाव आयोग बना, लेकिन पीएम की सिफरिश पर ही आयुक्त बने, इस बीच 21 आयुक्त बनाए गए। 2023 तक कोई कानून नहीं था। सुप्रीम कोर्ट ने कहाकि इसमें पारदर्शिता होनी चाहिए, तब हमने कहाकि हमें दिक्कत नहीं है। हमने कहा कि जब तक कानून नहीं बनता सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में सब कुछ हो। इसके बाद कानून बना।

2. राहुल का सवालः चुनाव के 45 दिन बाद सीसीटीवी फुटेज क्यों डिलीट किए।

शाह का जवाबः इन्होंने चुनाव आयोग के सीसीटीवी फुटेज 45 दिन में नष्ट करने की आपत्ति जताई। जनप्रतिनिधि कानून 1991 के कानून में साफ लिखा के 45 दिन बाद इसे कोई चुनौती नहीं दे सकता। जब 45 दिन में कोई आपत्ति नहीं आई तो चुनाव आयोग इसे क्यों रखें। सीसीटीवी रिकॉर्डिंग संवैधानिक दस्तावेज नहीं है। आंतरिक प्रबंधन है, फिर भी आयोग ने कहाकि सामान्य जनता को एक्सेस मिल सकता है। कोई भी 45 दिन में शीर्ष अदालत में जाकर इसे मांग सकता है। ये कोई प्रक्रिया पढ़ते नहीं है। पॉलिटिकल एजेंट भी अदालत से इसे प्राप्त कर सकता है।

3. राहुल का सवालः दिसंबर 2023 में कानून बदला कि चुनाव आयुक्त को दंडित नहीं किया जा सकता।
शाह का जवाबः आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयोग को कानून बनाकर इम्युनिटी दी। जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 से ज्यादा उन्हें कोई इम्युनिटी नहीं दी गई है। 2023 के कानून में भी प्रावधान पहले वाला ही है कि मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कोई केस नहीं कर सकता।

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