उम्र से नहीं, कोशिकाओं की मरम्मत रुकने से आता है बुढ़ापाः डॉ. नरेंद्र मल्होत्रा
कहा, योग, आहार और थेरेपी से रोकी जा सकती है बुढापे की रफ्तार
कानपुर में हुई कांफ्रेंस में डॉ. मल्होत्रा लिविंग लीजेंड अवॉर्ड से सम्मानित
आगरा। बुढ़ापा उम्र बढ़ने का नहीं, बल्कि शरीर में होने वाली जैविक गिरावट का परिणाम है जिसे कुछ हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। यह चैंकाने वाली जानकारी उजाला सिग्नस रेनबो हॉस्पिटल के प्रबंध निदेशक और जाने-माने स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. नरेंद्र मल्होत्रा ने फेडरेशन ऑफ ऑब्स्टेट्रिक एंड गायनेकोलॉजि कल सोसाइटीज ऑफ इंडिया (फॉगसी) की तीन दिवसीय प्रेसिडेंशियल कांफ्रेंस में दी। उन्होंने इससे बचाव के उपाय भी सुझाए हैं।
कानपुर में हुई कांफ्रेंस में उन्होंने एजिंग (बढ़ती उम्र) पर अपने व्याख्यान में कहा कि शरीर में टेलोमेयर के छोटे होना, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और कोशिकाओं की मरम्मत की क्षमता कमजोर पड़ना बुढ़ापे की प्रमुख वजहें हैं। बुढ़ापे से बचाव के लिए जीवनशैली में बदलाव सबसे अहम है। नियमित योग, ध्यान और संतुलित आहार को अपनाकर इस प्रक्रिया को धीमा किया जा सकता है। उन्होंने एंटी- ऑक्सीडेंट युक्त भोजन, जैसे हरी पत्तेदार सब्जियां, रंगीन फल और नट्स के सेवन पर जोर दिया। साथ ही पर्याप्त नींद और तनाव मुक्त रहने को भी जरूरी बताया।
डॉ. मल्होत्रा ने आधुनिक मेडिकल साइंस की प्रगति का जिक्र करते हुए कहाकि हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (एचआरटी) और स्टेम सेल थेरेपी जैसी उन्नत चिकित्सा पद्धतियां भी अब एजिंग की रफ्तार को कम करने और जीवन की गुणवत्ता को बनाए रखने में मददगार साबित हो रही हैं। उन्होंने सलाह दी कि ऐसे किसी भी उपचार को केवल किसी योग्य चिकित्सक की देखरेख में ही लेना चाहिए।
डाॅ. नरेन्द्र मल्होत्रा ने कहाकि बुढ़ापा एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, लेकिन स्वस्थ आदतों और चिकित्सकीय सलाह के जरिए हम न केवल लंबी, बल्कि एक स्वस्थ और सक्रिय जिंदगी जी सकते हैं। सम्मेलन में कई डॉक्टरों ने भाग लिया और नए चिकित्सा शोधों पर चर्चा की। इससे पहले पूर्व मंत्री अनुप्रिया पटेल ने डॉ. नरेंद्र मल्होत्रा को लिविंग लीजेंड अवॉर्ड से सम्मानित किया। उन्हें कांफ्रेंस के अंतिम दिन मीरा अग्निहोत्री ऑरेशन अवॉर्ड से भी नवाजा गया।
