रेलवे ने की लोको पायलट, सहायक लोको पायलट और गार्ड के भत्ते में वृद्धि की घोषणा

0
Railway

बढ़ी हुई दरें जनवरी 2024 से होंगी प्रभावी, हजारों कर्मियों को मिलेगा लाभ

वृद्धि का लाभ लोको रनिंग स्टाफ और ट्रैफिक रनिंग स्टाफ को भी मिलेगा

नयी दिल्ली। रेलवे ने लोको पायलट, सहायक लोको पायलट, गार्ड के लिए किलोमीटर भत्ते और किलोमीटर भत्ते के बदले मिलने वाले भत्ते (एएलके) की दरों में बढ़ोतरी की घोषणा की है। रेल मंत्रालय ने रविवार को बताया कि इस कदम का उद्देश्य कर्मचारियों के कल्याण को मजबूत करना और उन अग्रिम पंक्ति के कर्मियों के पारिश्रमिक में सुधार करना है, जो देश के रेल नेटवर्क के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करते हैं। बढ़ी हुई दरें जनवरी, 2024 से प्रभावी होंगी। इससे हजारों लोको पायलट, सहायक लोको पायलट, गार्ड, दमकलकर्मी और अन्य परिचालन कर्मचारियों को लाभ मिलेगा।

आधिकारिक बयान के अनुसार, इस संशोधन में लोको रनिंग स्टाफ और ट्रैफिक रनिंग स्टाफ दोनों को शामिल किया गया है। ये कर्मचारी ट्रेनों को चैबीसों घंटे चालू रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। रेलवे के अनुसार नए ढांचे के तहत, सभी श्रेणी के लोको पायलट (मेल, पैसेंजर, गुड्स और शंटिंग) के साथ-साथ सहायक लोको पायलट और दमकलकर्मी को हर 100 किमी पर ज्यादा किलोमीटर भत्ता और हर 160 किमी पर उसके हिसाब से एएलके मिलेगा। इससे परिचालन ड्यूटी से होने वाली कमाई में काफी बढ़ोतरी होगी। इसी तरह, ट्रैफिक रनिंग स्टाफ जिसमें मेल-एक्सप्रेस गार्ड, पैसेंजर और गुड्स गार्ड, साथ ही सहायक गार्ड और ब्रेकसमैन (जिन्हें अब ट्रेन मैनेजर कहा जाता है) को भी भत्ते की नयी दरों का फायदा मिलेगा।

रेलवे ने उम्मीद जतायी है कि इस कदम से लगातार और मुश्किल ट्रेन परिचालन में लगे कर्मचारियों को आर्थिक मदद मिलेगी। उनका वेतन मौजूदा महंगाई भत्ते के हिसाब से तय होगा। मंत्रालय ने बताया कि नयी दरें रेलवे सेवा (संशोधित वेतन) नियम, 2016 के तहत लागू की जा रही हैं और किलोमीटर भत्ते और एएलके की पात्रता से जुड़े सभी मौजूदा नियम और शर्तें पहले जैसी ही रहेंगी। मंत्रालय ने कहा कि यह फैसला संगठन की अपने रनिंग स्टाफ (जिन्हें अक्सर रेलवे परिचालन की रीढ़ माना जाता है ) के कल्याण और आर्थिक भलाई के प्रति लगातार प्रतिबद्धता को दिखाता है। अधिकारियों ने बताया कि इस बदलाव से न सिर्फ रनिंग स्टाफ के अहम योगदान को पहचान मिलती है, बल्कि पूरे सिस्टम में उनका मनोबल और काम करने की क्षमता भी बढ़ती है। इस कदम के साथ, भारतीय रेलवे ने कर्मचारी-केंद्रित नीतियों पर अपना ध्यान और मजबूत किया है और यह सुनिश्चित किया है कि वेतन का ढांचा बदलते आर्थिक हालात के हिसाब से बना रहे।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *