मिजोरम के लिए मालगाडी से अनाज की ढुलाई शुरू, सैरांग पहुंची एफसीआई की अनाज की रैक

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नयी दिल्ली। पूर्वोत्तर में रेल मार्ग से यात्री सेवाओं और माल परिवहन की सुविधा के विस्तार की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के तहत पहली बार भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के अनाज की खेप लेकर एक मालगाड़ी मिजोरम के सैरांग रेलवे स्टेशन पर पहुंची है। रेल मंत्रालय की विज्ञप्ति के अनुसार तीन मार्च को मिजोरम के गंतव्य पर पहुंचने वाली इस मालगाड़ी में 42 वैगन थे। इस ट्रेन में पंजाब से लगभग 25,900 क्विंटल चावल मिजोरम पहुंचाया गया है।

रेल मंत्रालय का कहना है कि राज्य में मालगाड़ी से ढुलाई की सुविधा होने से आपूर्ति सुचारु रखने में मदद मिल रही है। विज्ञप्ति में कहा गया है कि सैरांग में एफसीआई के अनाज की रेक सफलता पूर्वक उतार ली गई है। यह इस स्टेशन की माल संभालने की रेलवे की बढ़ती परिचालन क्षमता को दर्शाता है। मिजोरम के लॉजिस्टिक्स और खाद्य वितरण नेटवर्क मजबूत करने में रेलवे की भूमिका बढ़ रही है। मंत्रालय के अनुसार पैसेंजर और मालगाड़ी सर्विस शुरू होने के साथ, मिजोरम ने पूरे राज्य में यात्रा और माल परिवहन में एक बड़ा बदलाव देखा है। साथ ही मिजोरम में पर्यटन कारोबार को और मजबूती मिली है।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल 13 सितंबर को 51.38 किलो मीटर लंबी बैराबी-सैरांग रेलवे लाइन का उद्घाटन किया था जिससे राज्य को सीधे नेशनल रेलवे नेटवर्क से जोड़कर आइजोल को भारत के रेल-मार्ग मानचित्र पर ला दिया है। बैराबी-सैरांग सेक्शन पर माल ढुलाई के काम में इसके चालू होने के बाद से काफी तेजी आई है। यह ध्यान देने वाली बात है कि उद्घाटन के तुरंत बाद 21 सीमेंट वैगन वाला पहला माल ढुलाई रेक सफलतापूर्वक सैरांग ले जाया गया, जिससे राज्य में रेगुलर माल ढुलाई की शुरुआत हुई। अप्रैल 2025 से अब तक, सैरांग टर्मिनल से माल से लदी 30 से ज्यादा गाड़ियों का आवागमन हुआ है। मंत्रालय के अनुसार यह दर्शाता है कि मिजोरम में रेल आधारित माल परिवहन धीरे-धीरे गति पकड़ने लगा है।

मिजोरम में पर्यटन को गति मिल रही है

मिजोरम में नवनिर्मित रेलवे लाइन ने पर्यटन को बढ़ावा दिया है। फलस्वरूप पिछले छह महीनों में राज्य में पर्यटकों की संख्या में लगातार वृद्धि देखी गई है। 12 फरवरी 2026 को नॉर्थ ईस्ट डिस्कवरी सर्किट के तहत भारत गौरव डीलक्स एसी पर्यटक ट्रेन पहली बार सैरांग रेलवे स्टेशन पर पहुंची तो मिजोरम में रेलवे सेवाओं ने एक नया मुकाम हासिल किया।

भारत के विभिन्न हिस्सों के साथ-साथ अमेरिका और नेपाल जैसे अन्य देशों से आए 81 पर्यटकों को ले जा रही यह प्रीमियम पर्यटक ट्रेन, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर मिजोरम की बढ़ती लोकप्रियता को रेखांकित करती है। बेहतर पहुंच ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित किया है। इससे आतिथ्य और संबद्ध क्षेत्रों में रोजगार सृजन हो रहा है। पर्यावरण-पर्यटन और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ समावेशी विकास और क्षेत्रीय एकीकरण की व्यापक दृष्टि के तहत पूर्वोत्तर में मिजोरम एक उभरते हुए पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित हो रहा है।
यात्रियों की संख्या में वृद्धि

सितंबर 2025 में बैराबी-सैरांग मार्ग पर रेल सेवाओं के प्रारंभ होने के बाद से, जनता की प्रतिक्रिया जबरदस्त रही है। सैरांग-आनंद विहार राजधानी एक्सप्रेस में दोनों दिशाओं में 150 प्रतिशत से अधिक सीटें भरी गई हैं। इसी प्रकार, सैरांग-गुवाहाटी एक्सप्रेस और सैरांग-कोलकाता एक्सप्रेस में भी 100 प्रतिशत से अधिक सीटें भरी गई हैं। इससे, सैरांग से रेल सेवाओं की मजबूत मांग और जनता की व्यापक स्वीकृति का स्पष्ट रूप से पता चलता है। 9 फरवरी 2026 को, सैरांग से सिलचर के लिए एक नई रेल सेवा को हरी झंडी दिखाकर शुरू किया गया। इससे क्षेत्रीय परिवहन को और मजबूती मिली और मिजोरम असम की महत्वपूर्ण शैक्षिक, चिकित्सा और वाणिज्यिक केंद्र बराक घाटी से जुड़ गया।

रेल संपर्क का विस्तार मिजोरम के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। परिवहन में सुधार, आर्थिक विकास को बढ़ावा देने और पर्यटन को प्रोत्साहित करने में रेलवे राज्य के परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। बुनियादी ढांचे के निरंतर विकास के साथ, मिजोरम उत्तर-पूर्वी भारत में एक सुलभ और आकर्षक पर्यटन स्थल के रूप में उभर रहा है।

 

 

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