रीढ़ का इलाज अब बिना डर व तकनीकों से शानदार परिणामः डॉ तरुणेश शर्मा

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उजाला सिग्नस रेनबो हॉस्पिटल में हुआ न्यूरो स्पाइन डे पर जागरुकता प्रोग्राम

आगरा। रीढ़ की सर्जरी पूरी तरह सुरक्षित है। डर के कारण सर्जरी में देरी करना या टालना गंभीर नुकसान का कारण बन सकता हैै। समय पर इलाज से स्थायी विकलांगता से बचा जा सकता है। ये बातें सीनियर न्यूरो सर्जन डॉ. तरुणेश शर्मा ने उजाला सिग्नस रेनबो हॉस्पिटल में न्यूरो स्पाइन दिवस पर विशेष जागरूकता कार्यक्रम में कही। इस कार्यक्रम का मकसद रीढ़ की सर्जरी से जुड़े भ्रमों को दूर करना और जनता को इसकी सुरक्षित व न्यूनतम इनवेसिव तकनीकों से परिचित कराना था।

डॉ. तरुणेश शर्मा ने रीढ़ संबंधी विभिन्न स्थितियों और जन्मजात स्पाइनल डिस्रैफिज्म, स्कोलियोसिस, रीढ़ की चोटें, डीजेनरेटिव स्थितियां और ऑस्टियो पोरोटिक फ्रैक्चर पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मिनिमली इनवेसिव स्पाइन सर्जरी, एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी और बैलून काइफोप्लास्टी जैसी आधुनिक तकनीकें अब नियमित और सुरक्षित हैं, जो मरीजों को कम दर्द और तेज रिकवरी का लाभ देती हैं।
सीनियर न्यूरो सर्जन डॉ. विजयवीर ने इन न्यूनतम इनवेसिव तकनीकों के सिद्धांतों को समझाते हुए कहाकि छोटे चीरे और उन्नत तकनीक की मदद से रीढ़ की सर्जरी अब पहले से कहीं अधिक सटीक और कम दर्दनाक हो गई है। स्पाइनल फिक्सेशन और इम्प्लांट जैसी प्रक्रियाएं भी अब कम जोखिम के साथ की जा रही हैं, जिससे मरीजों को अस्पताल में कम दिन रुकना पड़ता है और वे जल्दी सामान्य जीवन में लौट पाते हैं।
डॉ. जयदीप मल्होत्रा ने रीढ़ की समस्याओं से बचाव के लिए नियमित व्यायाम, सही आसन और जीवनशैली में सुधार पर जोर दिया। वहीं, डॉ. नरेंद्र मल्होत्रा ने लोगों को सलाह दी कि वे साक्ष्य-आधारित चिकित्सा पर भरोसा करें और अयोग्य चिकित्सकों के चंगुल में न फंसें, जो गैर-वैज्ञानिक तरीकों से उनकी स्थिति को और बिगाड़ सकते हैं। इस मौके पर जोनल हेड तेज सिंह और यूनिट हेड अभिषेक जैन ने सभी का आभार जताया। प्रोग्राम में डॉक्टरों और स्टाफ के कई सदस्यों ने भाग लिया।

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