अखिलेश-आजम मुलाकातः जज्बातों ने खामोशी से की बात
सपा प्रमुख बोले, आजम परिवार पर भाजपा बनाना चाहती है केसों का वल्र्ड रिकॉर्ड
क्या सुलझ गए सपा के अंदरूनी मतभेद? रामपुर में आजम से मिले सपा सुप्रीमो
रामपुर। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने आजम खान के जेल से छूटने के बाद पहली बार बुधवार को मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच बंद कमरे में 2 घंटे तक बातचीत चली। इस दौरान आजम की पत्नी और बेटे भी मौजूद नहीं थे। पिछले महीने के आखिर में खान के जेल से रिहा होने के बाद यह उनकी पहली आमने- सामने की मुलाकात थी। दो घंटे से ज्यादा समय तक चली इस मुलाकात को सपा की पारंपरिक मुस्लिम-यादव एकता को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिसने कभी उत्तर प्रदेश में सपा के राजनीतिक प्रभुत्व को मजबूत किया था।
इस मुलाकात के बाद अखिलेश यादव ने कहाकि मैं आजम खान से मिलने आया हूं। आजम खान साहब बहुत वरिष्ठ नेता हैं। उनका गहरा प्रभाव हमेशा हम पर रहा है। यह एक बड़ी लड़ाई है और हम सब मिलकर इसे लड़ेंगे। उन्होंने कहाकि 2027 में हमारी सरकार बनने जा रही है और पीडीए की आवाज मजबूत होगी। उन्होंने कहाकि आजम खान पार्टी की धड़कन, पुराने लोगों की बात ही अलग है। अखिलेश ने मुलाकात की तस्वीरें साझा करते हुए एक्स पर लिखा कि क्या कहें भला उस मुलाकात की दास्तान, जहां बस जज्बातों ने खामोशी से बात की।
अखिलेश का यह दौरा सपा नेतृत्व के साथ आजम खान के तनावपूर्ण संबंधों को लेकर महीनों से चल रही अटकलों के बाद हो रहा है। पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक और सबसे प्रभावशाली मुस्लिम नेताओं शुमार आजम खान ने कई आपराधिक मामलों में लंबे समय तक जेल में रहने के बाद खुद को सक्रिय राजनीति से दूर कर लिया था। उनके समर्थकों ने अक्सर इस बात पर नाराजगी जताई थी कि उनकी कानूनी परेशानियों के दौरान पार्टी ने उन्हें समर्थन नहीं दिया।
इसलिए बुधवार की बैठक दिखावे से कहीं आगे जाती है। यह इस बात का संकेत है कि अखिलेश 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले आंतरिक मतभेदों को पाटने और वरिष्ठ नेताओं को फिर से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि आजम खान ने इस बैठक के लिए स्पष्ट शर्तें तय की थीे। वह केवल अखिलेश से मिलेंगे, अन्य सपा नेताओं से नहीं। यह इस बात का संकेत है कि विश्वास तो फिर से बन रहा है, लेकिन यह अभी भी कमजोर है।
