जिसके माथे पर तिलक लगा हो, सिर पर शिखा हो, उसके साथ ऐसा व्यवहार ठीक नहींः देवकीनंदन ठाकुर

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विराट हिंदू सम्मेलन में आए कथावाचक ने प्रयागराज विवाद आपसी सुलह से निपटाने की अपील की

आगरा। कथा वाचक देवकी नंदन ठाकुर ने प्रयागराज में शंकराचार्य स्वामी अवि मुक्तेश्वरानंद सरस्वती के साथ हुई घटना पर कहाकि इस विषय पर मैं धर्मसंकट में हूं। फिर भी इतना जरूर कहूंगा कि जिसके माथे पर तिलक हो, उसके साथ प्रशासन को ऐसा व्यवहार नहीं करना चाहिए। कथावाचक ने यह बात पत्रकारों से बातचीत के दौरान कही।

विराट हिन्दू सम्मेलन को सम्बोधित करने के बाद पत्रकारों से बातचीत में कथावा चक देवकीनंदन ठाकुर ने कहाकि शंकराचार्य मेरे लिए भगवान समान हैं। इस विवाद पर मैं बोलना उचित नहीं समझता, लेकिन प्रशासन से इतना जरूर कहना चाहूंगा कि जिसके माथे पर तिलक लगा हो, उसके साथ ऐसा कोई व्यवहार नहीं करना चाहिए जिससे हिंदुत्व और सनातन का अपमान हो। संत समाज को ऐसे विवाद एक साथ बैठकर सुलझा लेने चाहिए। इन्हें ज्यादा बढ़ावा नहीं देना चाहिए। उन्होंने कहाकि ऐसे हालात में विवाद को और बढ़ाना नहीं चाहिए। आपसी मतभेद भुलाकर प्यार से प्रत्येक सनातनी को एक स्वर में बैठकर सुलझाना चाहिए। उसे उलझाना नहीं चाहिए।

कथावाचक ने कहाकि प्रशासन को भी चाहिए कि जिसके माथे पर तिलक हो, जिसके सिर पर शिखा हो और जिसने भगवाधारण किया हो, उसे आदर दें। ऐसे मारपीट ठीक नहीं है। लोग हमें बांटने का प्रयास कर रहे हैं, हमें लड़ाने का प्रयास कर रहे हैं, उस प्रयास को निष्फल करें, उसे कामयाब न होने दें। ऊंच-नीच छोड़कर सभी सनातनी एक साथ अपनी आने वाली जनरेशन के लिए काम करें, धर्म के लिए काम करें और अपने देश के लिए काम करें।

 

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