वांग्मय सिर्फ लेखों का संग्रह नहीं बल्कि देश के सांस्कृतिक पुनर्जागरण का ब्लूप्रिंट
वाङ्मय भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में एक कालजयी और दूरदर्शी प्रयास के रूप में रहेगा स्मरणीय
आगरा। महामना पंडित मदन मोहन मालवीय का दृष्टिकोण दूरदर्शी था, जिनका दृढ़ विश्वास था कि भारत का भविष्य उसके अतीत को त्यागने में नहीं, बल्कि उसे पुनर्जीवित करने में है। उन्होंने भारत के प्राचीन मूल्यों और आधुनिक लोकतांत्रिक आकांक्षाओं के बीच एक सेतु का काम किया। यह बात दिल्ली में भारत मंडपम में आयोजित महामना मालवीय के संपूर्ण कार्यों की कृति की अंतिम श्रृंखला महामना वांग्मय के विमोचन करते हुए उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने गुरुवार को कही।
उन्होंने कहाकि महामना मालवीय को एक महान राष्ट्रवादी, पत्रकार, समाज सुधारक, वकील, राजनेता, शिक्षाविद् और प्राचीन भारतीय संस्कृति के एक प्रतिष्ठित विद्वान और महान स्वतंत्रता सेनानी के रूप में याद किया जाता है। राधाकृष्णन ने पंडित मालवीय की वैज्ञानिक और तकनीकी शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता पर प्रकाश डालते हुए कहाकि यह प्राचीन और आधुनिक सभ्यताओं के सर्वोत्तम तत्वों में सामंजस्य स्थापित करने की उनकी क्षमता को दर्शाता है।
उपराष्ट्रपति ने कहाकि महामना वांग्मय सिर्फ लेखों का संग्रह नहीं है यह भारत के स्वतंत्रता संग्राम के बौद्धिक डीएनए और देश के सांस्कृतिक पुनर्जागरण के लिए एक ब्लूप्रिंट का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने विश्वविद्यालयों, विद्वानों और युवा शोधकर्ताओं से इन खंडों के साथ सक्रिय रूप से जुड़ने का आग्रह किया। पद्म भूषण श्री राम बहादुर राय ने पूना पैक्ट का विशेष उल्लेख करते हुए महामना जी की ऐतिहासिक भूमिका को सामाजिक सौहार्द और राष्ट्रीय एकात्मता के संदर्भ में रेखांकित किया।
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष राम बहादुर राय, महामना मालवीय मिशन के अध्यक्ष हरि शंकर सिंह और प्रकाशन विभाग के प्रधान महानिदेशक भूपेंद्र कैंथोला भी मौजूद रहे। अध्यक्षता महामना मालवीय मिशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष हरिशंकर सिंह ने की। राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वेद प्रकाश सिंह के निर्देशन में मिशन की वाङ्मय समिति और संगठन के पदाधिकारियों ने इस कार्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस मौके पर समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष हरिशंकर सिंह ने सभी अतिथियों, विद्वानों, सहयोगकर्ताओं सम्मान और अभिनंदन किया।
मिशन के संरक्षक प्रभुनारायण श्रीवास्तव, कोषाध्यक्ष दिनकर सिंह, गोविंद राम अग्रवाल, रोहित सिन्हा, डॉ. अनिमेष सक्सेना, विजय तिवारी, अर्चना गुप्ता, सीबी त्रिपाठी, गुलाब शुक्ला, शरद श्रीवास्तव, ब्रजेश श्रीवास्तव, प्रकाश गौतम सहित देशभर की विभिन्न शाखाओं से आए शिक्षाविद, कुलपति, चिंतक समाजसेवी उपस्थित रहे।
आगरा संभाग से महामना मालवीय मिशन के महासचिव राकेश शुक्ला ने प्रतिनि धित्व किया। उनके साथ आगरा संभाग के अध्यक्ष हृदेश यादव, श्रीकृष्ण गौतम, प्रो. डॉ. मिथिलेश सिंह, डॉ. आरती शर्मा, सुरेश तिवारी, मुकेश सिंह, रुद्र प्रताप सिंह सहित अनेक समर्पित कार्यकर्ता औरं प्रबुद्धजनों ने भाग लिया।





