मथुरा हादसाः जलती बस में फंसे बच्चों की तो बचा ली जान, खुद नहीं निकल पाई पार्वती
मथुरा। यह मां की ममता ही थी कि उसने टूटी खिड़की से पहले अपने दोनों बच्चों को बाहर लटकाकर उनकी जान तो बचा ली, लेकिन खुद को नहीं बचा सकी। इस दौरान कांच का टुकड़ा उसकी गर्दन में घुस गया और वह लहूलुहान होकर गिर पड़ी। पार्वती की तलाश उसके देवर गुलजारी अस्पतालों में कर रहे हैं। जहां एंबुलेंस से लगातार काले पॉलीबैग में रखे क्षत-विक्षत शव लाए जा रहे हैं।
मथुरा में यमुना एक्सप्रेसवे पर मंगलवार तड़के सात बसों और तीन कारों के एक दूसरे में टकराने के बाद लगी आग में झुलसने से 13 लोगों की मौत हो गई। इसके अलावा दर्जनों लोग घायल हुए हैं। मथुरा पोस्टमार्टम गृह के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए गुलजारी ने बताया कि उसकी भाभी पार्वती अपने बच्चों प्राची और सनी को बाहर निकालने की कोशिश के दौरान बस के अंदर ही बेहोश होकर गिर पड़ी। अब तक पार्वती का कोई पता नहीं चल पाया है। पुलिस ने बताया कि सभी 13 लोगों की मौत झुलसने के कारण हुई और शव इतनी बुरी तरह झुलस चुके हैं कि शिनाख्त करना बेहद कठिन हो गया है। पुलिस अधीक्षक श्लोक कुमार ने कहाकि हम शवों के डीएनए नमूनों को उनके रिश्तेदारों के नमूनों से मिलाने के लिए सुरक्षित रख रहे हैं।
अब तक तीन मृत यात्रियों की पहचान हो चुकी है और उनके परिवारों से संपर्क किया जा रहा है। उनके अंतिम संस्कार की व्यवस्था की जा रही है। जो भी तथ्य सामने आएंगे, उन पर आगे कार्रवाई की जाएगी। कुछ स्थानीय लोगों ने बताया कि वाहनों की टक्कर की आवाज कई किलोमीटर दूर के गांवों तक सुनाई दी, जिससे सुबह की शांति भयावह चीख-पुकार में बदल गई। भारी धुंध के कारण बचाव कार्य में भी कठिनाइयां आईं।
