शीतकालीन सत्रः संसद में असहमति के बीच सहमति, 8 दिसंबर को वंदे मातरम पर 10 घंटे चर्चा, अगले दिन एसआईआर पर होगी बहस
नई दिल्ली। संसद के शीतकालीन सत्र का दूसरा दिन भी भारी हंगामे की भेंट चढ़ गया। विपक्ष ने एसआईआर (सिस्टेमेटिक इलेक्टर्स रजिस्ट्रेशन) और कथित वोट चोरी के मुद्दे को लेकर सरकार पर लगातार दबाव बनाए रखा। जैसे ही पूर्वान्ह 11 बजे लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी सांसद नारेबाजी करते हुए वेल में पहुंच गए और वोट चोर-गद्दी छोड़ो जैसे स्लोगन लहराने लगे।
स्पीकर ने प्रश्नकाल को किसी तरह आगे बढ़ाने की कोशिश की, लेकिन करीब 20 मिनट तक लगातार जारी शोर-शराबे के कारण उन्हें पहले 12 बजे तक, फिर दोपहर 2 बजे तक और अंत में 3 दिसंबर े तक के लिए सदन स्थगित करना पड़ा। राज्यसभा की स्थिति भी अलग नहीं रही। ऊपरी सदन में भी विपक्ष ने एसआईआर और चुनावी अनियमितताओं के आरोपों को लेकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया, जिससे पूरी कार्यवाही बार-बार बाधित होती रही।
विपक्ष का कहना है कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए आवाज उठाना जरूरी है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सुबह 10.30 बजे संसद परिसर में मकर द्वार के सामने विपक्षी दलों के साथ संयुक्त प्रदर्शन का नेतृत्व किया। उनका स्पष्ट कहना है कि जब तक सरकार एसआईआर पर विस्तृत चर्चा नहीं कराती, तब तक विरोध जारी रहेगा।
दूसरी ओर सरकार ने अपने रुख में लचीलापन दिखाते हुए कहाकि वह चुनावी सुधारों पर किसी भी समय चर्चा को तैयार है, बशर्ते विपक्ष पहले से समय-सीमा या शर्तें न लगाए। सूत्रों के अनुसार विपक्ष ने भी एक समझौते का संकेत दिया है और प्रस्ताव रखा है कि चर्चा के दौरान एसआईआर शब्द की जगह इलेक्टोरल रिफॉर्म या कोई अन्य स्वीकार्य नाम इस्तेमाल किया जा सकता है। सरकार इस सुझाव को लेकर सकारात्मक दिख रही है और बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की अगली बैठक में अपना अंतिम रुख स्पष्ट कर सकती है।
हालांकि गतिरोध अभी जारी है, लेकिन नामकरण पर सहमति बनने से बुधवार को चर्चा शुरू होने की संभावना मजबूत हो गई है, जिससे उम्मीद है कि सत्र के माहौल में कुछ सुधार देखने को मिल सकता है।
