उपभोक्ता आयोग का फैसलाः इलाज में बरती गई लापरवाही, अस्पताल को देना होगा 1.45 लाख का मुआवजा

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आगरा। मरीज के इलाज में लापरवाही बरतने का दोषी मानते हुए जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग-प्रथम, आगरा अध्यक्ष सर्वेश कुमार और सदस्य राजीव सिंह की कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए शांतिवेद हॉस्पिटल के डॉ. अजय प्रकाश, डॉ. स्वेतांक प्रकाश और डॉ. एचसी साहनी को मरीज के उत्तराधिकारियों को 1.45 लाख रुपये का मुआवजा देने के आदेश किए।

परिवादी श्रीकिशन गुप्ता (जिनकी बाद में मृत्यु हो गई) ने यह परिवाद अपनी पत्नी चंद्रकला के गॉल ब्लैडर ऑपरेशन में कथित चिकित्सकीय लापरवाही के बरतने का आरोप लगाते हुए वाद दायर किया था। परिवादी के अनुसार 10 फरवरी 2014 को शांतिवेद हाॅस्पिटल में उनकी पत्नी चंद्रकला के गॉल ब्लैडर का ऑपरेशन डॉ. अजय प्रकाश, डॉ. स्वेतांक प्रकाश और डॉ. एचसी साहनी द्वारा किया गया था। परिवादी ने आरोप लगाया कि डॉक्टरों की लापरवाही के कारण मरीज का बिलियरी सिस्टम क्षतिग्रस्त हो गया और बाइल (पित्त) पेट में लीक होने लगा, जिससे सेप्टीसीमिया (रक्त में जहर) फैल गया। ऑपरेशन के बाद मरीज को बिना सर्टिफि केट दिए 11 फरवरी 2014 को डिस्चार्ज कर दिया। दोबारा भर्ती करने पर 16 फरवरी को बाइल ड्रेन करने के लिए ट्यूब डाली गई और 19 फरवरी को फिर बिना सर्टिफिकेट के डिस्चार्ज कर दिया गया।

आरोप है कि गलत ऑपरेशन के कारण सीबीडी (कॉमन बाइल डक्ट) फिस्चुला बन गया और 12 सितम्बर 2014 को चंद्रकला की संक्रमण और सेप्टीसीमिया के कारण मृत्यु हो गई। आयोग ने दोनों पक्षों के अवधिवक्तों के तर्को और साक्ष्यों का अवलोकन किया। प्रतिपक्षी डॉक्टरों की ओर से तर्क दिया गया कि ऑपरेशन फ्री कैंप में किया गया था और कोई शुल्क नहीं लिया गया था। इसलिए परिवादी उपभोक्ता नहीं है, लेकिन, आयोग ने पाया कि परिवादी ने शांतिवेद हॉस्पिटल द्वारा रजिस्ट्रेशन फीस 100 रुपये और ऑपरेशन चार्जेज 1100 रुपये की प्रस्तुत रसीदें से सिद्ध होता है कि ऑपरेशन के लिए फीस ली गई थी। इसके अलावा असोपा हॉस्पिटल में 75 हजार चिकित्सीय व्यय हुआ। आयोग ने माना कि मृतक परिवादी और उनके कानूनी उत्तराधिकारी उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 की धारा 2 (1) (डी) के तहत उपभोक्ता हैं। साथ ही डॉ. अजय प्रकाश और उनकी टीम द्वारा ऑपरेशन से पहले और बाद में रोगी की पर्याप्त देखभाल नहीं की गई और चिकित्सकीय मानकों के अनुसार मरीज को तैयार या डिस्चार्ज नहीं किया गया। आयोग ने माना कि बाइल लीक और फिस्चुला शांतिवेद हाॅस्पिटल के चिकित्सकों की लापरवाही के कारण ही हुआ। वहीं इस मामले में असोपा हॉस्पिटल के डॉक्टरों के विरुद्ध चिकित्सकीय लापरवाही साबित नहीं पाई। आयोग ने प्रतिपक्षी शांतिवेद हाॅस्पिटल के चिकित्सकों को लापरवाही का दोषी मानते हुए को परिवादी को आदेश के 45 दिन के अंदर चिकित्सीय व्यय की प्रतिपूर्ति 75 हजार रुपये, उपभोक्ता सहज सुख क्षतिपूर्ति के लिए 40 हजार और मानसिक पीडा क्षति और वाद व्यय के रूप में 30 हजार सहित 1.45 लाख रुपये का भुगतान छह फीसदी वार्षिक ब्याज सहित करने के आदेश दिए।

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