बिहार में भ्रष्ट नेता मंत्री बने तो जाऊंगा कोर्टः प्रशांत किशोर
बिहार में नीतीश के शपथ से पहले पीके ने बोला सरकार पर हमला
प्रशांत ने चुनाव आयोग और सरकारी मशीनरी पर भी उठाए सवाल
पटना। बिहार विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त के बाद पहली बार जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर मंगलवार को मीडिया से मुखातिब हुए। उन्होंने हार की जिम्मेदारी लेते हुए माफी मांगी। साथ ही नीतीश कुमार के शपथ ग्रहण समारोह से पहले प्रशांत किशोर ने सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहाकि अगर भ्रष्ट छवि वाले नेताओं को फिर से मंत्री बनाया गया तो उनकी पार्टी कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी।
प्रशांत किशोर ने पार्टी की चुनावी हार की जिम्मेदारी स्वीकार की, लेकिन साथ ही सरकार पर तीखे आरोप लगाए। उनका कहना है कि जिन चार नेताओं के बारे में उन्होंने पहले भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे, अगर उन्हें नई सरकार में जगह मिली तो वे जनहित याचिका दायर करेंगे। उन्होंने कहाकि लोगों ने सरकार को बड़ा जनादेश दिया है। अब जिम्मेदारी सरकार की है कि ऐसे नेताओं को मंत्रिमंडल में शामिल न करंे। अगर ऐसा हुआ तो हम कोर्ट जाएंगे।
प्रशांत किशोर ने दावा किया कि आजाद भारत में पहली बार किसी राज्य सरकार ने चुनाव से पहले जनता के लिए 40 हजार करोड़ रुपये खर्च करने का वादा किया और इसी वजह से एनडीए को भारी बहुमत मिला। उन्होंने कहाकि लोगों ने 10 हजार रुपये के लिए वोट बेचे, यह कहना गलत है। बिहार का वोटर अपना भविष्य नहीं बेचता।
पीके ने कहाकि चुनाव आयोग और सरकारी मशीनरी पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
पीके ने आरोप लगाया कि हर विधानसभा क्षेत्र में 60 हजार से 62 हजार लोगों को 10 हजार रुपये देने की बात फैलाई गई। 2 लाख रुपये के लोन का वादा किया गया। सरकारी अधिकारी ड्यूटी पर रहते हुए लोगों को बता रहे थे कि एनडीए के आने पर उन्हें लोन मिलेगा। साथ ही जीविका दीदियों को चुनावी मोबलाइजर के रूप में इस्तेमाल किया गया।
चुनाव आयोग पर भी उठाए सवाल
प्रशांत किशोर ने कहाकि असली चिंता वोट चोरी नहीं बल्कि सरकारी सिस्टम का दुरुपयोग है। उन्होंने दावा किया कि मतदान के आखिरी दो घंटों में कई जगहों पर 15-20 प्रतिशत तक वोटिंग बढ़ने का पैटर्न सामने आया, लेकिन चुनाव आयोग ने इसका कोई विस्तृत रिकॉर्ड सार्वजनिक नहीं किया।
पीके ने विपक्ष से भी अपील करते हुए कहाकि हम छोटी पार्टी हैं, लेकिन विपक्ष से निवेदन है कि इसे गंभीरता से लें। जरूरत हो तो सुप्रीम कोर्ट जाएं।
