कानपुर मेट्रो बेस्ट कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट श्रेणी में सीआईडीसी विश्वकर्मा पुरस्कार से सम्मानित

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नई दिल्ली में यूपीएमआरसी के निदेशक वक्र्स सीपी सिंह ने ग्रहण किया पुरस्कार

एमडी सुशील कुमार ने सम्मान को बताया टीम निष्ठा, समर्पण कार्य का प्रतीक

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (यूपीएमआरसी) द्वारा संचालित कानपुर मेट्रो परियोजना को बेस्ट कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट श्रेणी में सीआईडीसी विश्वकर्मा पुरस्कार प्रदान किया गया। योजना आयोग भारत सरकार के मार्गदर्शन में गठित सीआईडीसी द्वारा यह पुरस्कार निर्माण क्षेत्र में उत्कृष्टता और गुणवत्ता सुधार को प्रोत्साहित करने के लिए दिया जाता है। नई दिल्ली में आयोजित समारोह के दौरान प्रबंध निदेशक सुशील कुमार की ओर से निदेशक वक्र्स और इंफ्रास्ट्रक्चर सीपी सिंह और कानपुर मेट्रो के परियोजना निदेशक अरविन्द मीणा ने यह पुरस्कार ग्रहण किया।

सीआईडीसी की टीम ने पुरस्कार चयन प्रक्रिया के तहत मार्च माह में कानपुर मेट्रो परियोजना स्थलों, स्टेशनों और श्रमिक आवासों का निरीक्षण किया था। इस दौरान टीम ने कानपुर मेट्रो के मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी, गैर-किराया राजस्व के लिए फूड और रिटेल आउटलेट, पुस्तक मेले, सेलिब्रेशन ऑन व्हील्स जैसे प्रयासों की सराहना की थी। इससे पूर्व यूपीएमआरसी की लखनऊ और आगरा मेट्रो परियोज नाओं को भी क्रमशः 15 वां और 16 वां सीडीसी विश्वकर्मा पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।

समारोह में यूपीएमआरसी के निदेशक वक्र्स और इंफ्रास्ट्रक्चर सीपी सिंह को सीआईडीसी का अध्यक्ष प्रशंसा पुरस्कार भी प्रदान किया गया। यह सम्मान उन्हें देश में विश्वस्तरीय मेट्रो नेटवर्क के विकास में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए दिया गया। आयोजकों ने पुरस्कार समारोह के दौरान यूपीएमआरसी की टीम को बधाई देते हुए कहाकि रिकॉर्ड समय में कानपुर मेट्रो परियोजना का क्रियान्वयन, कुशल योजना और नवाचार का उत्कृष्ट उदाहरण है, जिससे शहरी सार्वजनिक परिवहन के नए मानक स्थापित हुए हैं।

इस मौके परयूपीएमआरसी के प्रबंध निदेशक सुशील कुमार ने कहाकि यह पुरस्कार हमारी टीम की लगन और निष्ठा का प्रतीक है। हम कानपुर मेट्रो कॉरिडोर-1 के बैलेंस सेक्शन (कानपुर सेंट्रल से नौबस्ता) और कॉरिडोर-2 (सीएसए से बर्रा-8) पर तेजी से कार्य कर रहे हैं। शीघ्र ही दोनों कॉरिडोर पर पूर्ण मेट्रो सेवा उपलब्ध होगी। कानपुर मेट्रो ने न केवल इंजीनियरिंग के नए मानक स्थापित किए हैं, बल्कि यह आधुनिक, समावेशी एवं पर्यावरण-अनुकूल शहरी परिवहन का मॉडल भी बन रही है। आने वाले समय में यह परियोजना यातायात दबाव कम करने के साथ-साथ कार्बन उत्सर्जन घटाकर आर्थिक विकास को नई गति देगी।

कुशल योजना, दक्षता और नवाचार का समन्वय

कानपुर मेट्रो में डबल टी-गर्डर, ट्विन पियर कैप, बड़े पैमाने पर प्रीकास्टिंग, संयुक्त टेंडर प्रणाली, सेमी टॉप-डाउन और इनवर्टेड शटरिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर निर्माण समय में उल्लेखनीय कमी लाई गई है। लॉन्चिंग और रिट्रीवल शाफ्ट्स के माध्यम से स्टेशन और टनल कार्यों को स्वतंत्र रूप से तेज गति से पूरा किया गया।

नई यात्रा संस्कृति का विकास

कानपुर मेट्रो ने परिवहन के साथ-साथ एक नई शहरी यात्रा संस्कृति विकसित की है। मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी, फूड और रिटेल आउटलेट, पुस्तक मेले, शो योर टैलेंट और सेलिब्रेशन ऑन व्हील्स जैसी पहलों ने यात्रियों के अनुभव को समृद्ध बनाया है।

पर्यावरण संरक्षण और सुरक्षा में अग्रणी

कानपुर मेट्रो के सभी स्टेशनों को आईजीबीसी द्वारा प्लैटिनम ग्रीन रेटिंग प्राप्त है। 100 प्रतिशत एलईडी लाइटिंग, रीजेनरेटिव ब्रेकिंग, सीओ2 सेंसर आधारित एचवीएसी प्रणाली जैसी तकनीकों से ऊर्जा दक्षता सुनिश्चित की जा रही है। सुरक्षा के लिए सीसीटीवी, महिला सुरक्षा कर्मी और पैसेंजर इमरजेंसी इंटरकॉम जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। उल्लेखनीय है कि कानपुर मेट्रो ने कॉरिडोर-1 के अंतर्गत प्रथम चरण में आईआईटी कानपुर से मोतीझील तक प्रायोरिटी सेक्शन मात्र 2 वर्ष 1.4 माह के रिकॉर्ड समय में पूरा किया था। द्वितीय चरण में 30 मई 2025 को मोतीझील से कानपुर सेंट्रल तक यात्री सेवा का विस्तार हुआ। वर्तमान में कॉरिडोर-1 के बैलेंस सेक्शन (कानपुर सेंट्रल-नौबस्ता) के अप-लाइन पर टेस्टिंग कार्य प्रगति पर है। लगभग 8.60 किमी लंबे संपूर्ण कॉरिडोर-2 (सीएसए से बर्रा-8) का सिविल निर्माण कार्य भी तीव्र गति से जारी है।

 

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