कार दुर्घटना क्लेमः 21 साल पुराने मामले में बीमा कंपनी को राहत, उपभोक्ता आयोग प्रथम ने दिया संशोधित क्लेम भुगतान का आदेश
आगरा। ताजनगरी में एक उपभोक्ता ने कार दुर्घटना बीमा क्लेम के लिए 21 साल तक कानूनी जंग चली। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग प्रथम के फैसले पर आंशिक बदलाव करते हुए राज्य उपभोक्ता आयोग ने दो दशक से भी अधिक पुराने मामले में महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। इस कानूनी लड़ाई में राज्य उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी द्वारा सर्वेयर की रिपोर्ट के आधार पर तय की गई राशि को ही अंतिम माना गया है।
डॉ. मुकुल चंद्रा ने अपनी होंडा एकॉर्ड कार यूपी-80-एक्स-2425 का बीमा न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी से कराया था। 5 जून 2003 को कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई, जिसकी मरम्मत में पीड़ित के अनुसार 98,489 रुपये खर्च हुए थे। हालांकि, बीमा कंपनी ने सर्वेयर की रिपोर्ट के आधार पर केवल 23,470 रुपये का क्लेम स्वीकार किया। इस पर परिवादी ने सेवा में कमी बताते हुए 22 दिसंबर 2004 को उपभोक्ता फोरम में चुनौती दी। जिला उपभोक्ता आयोग ने 17 अप्रैल 2014 को फैसला सुनाते हुए कंपनी को आदेश दिया कि वह सर्वेयर द्वारा तय राशि के अतिरिक्त 36,530 रुपये 7 फीसद वार्षिक ब्याज का भुगतान करे। इस आदेश के खिलाफ बीमा कंपनी ने राज्य उपभोक्ता आयोग में अपील दायर की। 20 सितंबर 2024 को राज्य आयोग ने पाया कि परिवादी ने सर्वेयर की रिपोर्ट को गलत साबित करने के लिए कोई ठोस साक्ष्य पेश नहीं किया। राज्य उपभोक्ता आयोग ने जिला उपभोक्ता आयोग के आदेश को संशोधित करते हुए केवल सर्वेयर द्वारा मूल्यांकित 23,470 रुपये की राशि को ही 7 प्रशिशत ब्याज के साथ भुगतान करने का आदेश दिया।
मामले के अंतिम निस्तारण के दौरान जिला उपभोक्ता आयोग (प्रथम) आगरा ने 10 अक्टूबर 2025 को आदेश जारी किया कि बीमा कंपनी द्वारा पूर्व में जमा की गई एफडीआर की परिपक्वता राशि से 54,685 रुपये (मूलधन मय ब्याज) का भुगतान डॉ. मुकुल चंद्रा को अकाउंट पेयी चेक के माध्यम से किया जाए। पंजाब नेशनल बैंक द्वारा जारी चेक संख्या 097345 के माध्यम से 39,072 रुपये की राशि का भुगतान आयोग के अध्यक्ष सर्वेश कुमार और सदस्य राजीव सिंह द्वारा डॉक्टर मुकेश चंद्र को दिया गया। इसके साथ ही इस लंबी चली कानूनी प्रकिया का समापन हुआ।
