बिना एजेंडे के चला नगर निगम सदन, पार्षदों ने किया हंगामा, नगर आयुक्त के खिलाफ निन्दा प्रस्ताव पारित

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महापौर हेमलता दिवाकर कुशवाह और नगरायुक्तं के बीच खुलकर सामने आई खींचतान

बोलीं महापौर, नहीं चलने दी जाएगी अधिकारियों की मनमानी, शासन में करेंगे शिकायत

आगरा। नगर निगम में महापौर और निगम प्रशासन के बीच टकराव अब खुलकर सामने आ गया है। सोमवार को सदन की बैठक बुलाने के निर्देेश के बाद भी नगर निगम सचिवालय द्वारा एजेंडा जारी नहीं किया गया। इसको लेकर पार्षदों में खासा आक्रोश दिखाई दिया। उन्होंने बिना एजेंडे के चले सदन में नगर आयुक्त के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पास किया। महापौर हेमलता दिवाकर कुशवाह ने इस मामले को लेकर खासी नाराजगी जताते हुए मामले को शासन तक ले जाने की चेतावनी दी।

नगर निगम के विशेष सदन में सोमवार को जमकर हंगामा हुआ। मेयर और नगरायुक्त के बीच चल रही रार उस समय बढ गई जब बिना किसी निर्धारित एजेंडे के सदन की कार्यवाही शुरू हुई। सदन से नगरायुक्त अंकित खंडेलवाल की गैरमौजूदगी को पार्षदों ने अपमान करार देते हुए उनके खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया। इस प्रस्ताव पर 72 पार्षदों ने हस्ताक्षर किए हैं। वही विपक्ष ने इसे भाजपा और सरकार की नाकामी करार दिया। महापौर ने इस मामले में कड़ा रुख अख्त्यिार करते हुए कहाकि सदन की गरिमा सर्वोपरि है। अधिकारी का सदन से गायब रहना जनप्रतिनिधियों की अनदेखी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्षदों द्वारा हस्ताक्षरित इस निंदा प्रस्ताव को उचित कार्रवाई के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ और नगर विकास मंत्री को भी भेजा जाएगा। बैठक में अधिकारियों के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पास कर मंडलायुक्त को सारी स्थिति से अवगत कराया। भाजपा पार्षदों ने अधिकारी की कार्यप्रणाली के खिलाफ नारेबाजी की। चर्चा के बीच असंतोष जताते हुए बसपा पार्षदों ने सदन से वॉकआउट किया। बिना एजेंडा सदन होने के कारण विकास कार्यों पर चर्चा नहीं हो सकी।

दरअसल, नगर निगम के अधिकारी इस बैठक टालने के पीछे उस शासनादेश का हवाला दे रहे हैं, जिसमें लोकसभा या विधानसभा की कार्यवाही के दौरान नगर निगम सदन आयोजित न करने की बात कही गई है। महापौर कार्यालय द्वारा जारी पत्र के अनुसार 23 मार्च को सामान्य सदन की बैठक बुलाने के निर्देश दिए गए थे। इसके लिए 13 मार्च को विस्तृत नोटिस जारी कर सुझाव दिया गया कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए बजट सदन आयोजित करना अधिक उपयुक्त रहेगा। ताकि वित्तीय वर्ष 2025-26 की समाप्ति से पहले नगर निगम का बजट पास कराया जा सके। निगम अधिकारियों का कहना है कि इस नोटिस पर अब तक कोई स्पष्ट निर्देश जारी नहीं हुए हैं, जिससे असमंजस की स्थिति बनी। नगर निगम प्रशासन ने इस मामले में मेयर से स्पष्ट दिशा-निर्देश मांगे हैं, ताकि आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके, लेकिन कोई निर्देश जारी नहीं हुआ। ऐसे में नगर निगम की बैठक को लेकर खींचतान बढ़ सकती है।

विपक्ष का हमला, ट्रिपल इंजन फेल

सदन में हंगामे के बीच बसपा पार्षदों ने भाजपा पर तीखा प्रहार किया। बसपा दल के नेता ने कहाकि यह विवाद भाजपा के ट्रिपल इंजन सरकार की विफलता का प्रमाण है। उन्होंने सुझाव दिया कि मेयर और नगरायुक्त को आपसी मनमुटाव बैठकर सुलझाना चाहिए ताकि शहर का विकास न रुके।

 

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