पर्यटन मंत्री के भाषण के दौरान बत्ती हुई गुल, बिना माइक के बोलते रहे प्रभारी मंत्री जयवीर सिंह

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बैटरी बैकअप वाला स्पीकर भी दे गया धोखा, अधिकारियों की निगाहें हुई टेढी

प्रभारी मंत्री द्वारा लगभग 12.40 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट का किया गया लोकार्पण

आगरा। बिजली विभाग ने एक बार फिर जगहंसाई करा दी। आगरा में गीता- गोविंद वाटिका के लोकार्पण के दौरान तब बत्ती गुल हो गई, जब यूपी के पर्यटन और संस्कृति मंत्री व आगरा के प्रभारी मंत्री जयवीर सिंह का भाषण चल रहा था। ऐसे में उन्हें बिना साउड सिस्टम के लिए 15 मिनट तक भाषण देना पड़ा। इस बीच बैटरी बैकअप वाला स्पीकर भी दगा दे गया। ऐसे में मंच पर बैठे अधिकारियों का पारा हाई हो गया। इसके बाद भी प्रभारी मंत्री का भाषण खत्म होने तक न तो बिजली आई और न ही बैटरी बैकअप वाला स्पीकर ऑन हो सका।

प्रभारी मंत्री जयवीर सिंह ने शुक्रवार को ताजनगरी फेस-2 स्थित जोनल पार्क में विकसित की गई गीता-गोविंद वाटिका का लोकार्पण किया। इस दौरान प्रभारी मंत्री सहित सभी अतिथि मंच पर मौजूद रहे। एक-एक कर सभी के भाषण हुए। इस दौरान बिजली ठीक-ठाक रही। फाउंटेशन शो भी चलता रहा।

विधायक डॉ. जीएस धर्मेश और विधायक भगवान सिंह कुशवाह के बाद प्रभारी मंत्री बोलने के लिए पोडियम माइक स्टैंड पर आए। उन्होंने उद्बोधन शुरू करने से पहले मंच पर बैठे सभी मेहमानों का नाम लिया ही था कि बत्ती गुल हो गई। जबकि फाउंटेशन शो चलता रहा। इस दौरान प्रभारी मंत्री ने कुछ समय के लिए अपना भाषण रोक दिया। वे दायें-बांये झांकने लगे। इधर, कर्मचारी भी दौड़ पड़े लेकिन जब बिजली नहीं आई तो प्रभारी मंत्री जयवीर सिंह ने बिना माइक के ही अपना उद्बोधन पूरा किया। उन्होंने गीता-गोविंद वाटिका की खासियस गिनाने के साथ ही प्रदेश सरकार की उपलब्धियां भी गिनाईं। पर्यटन व संस्कृति मंत्री बिना माइक के ही बोलते रहे।

इस दौरान प्रभारी मंत्री ने लगभग 12.40 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट का लोकार्पण किया।
जोनल पार्क के अंतर्गत गीता-गोविंद वाटिका में थीम सौन्दर्यीकरण, थीम विकास और थीम लाइटिंग व लेजर शो से संबंधित विकास कार्य लगभग 17.6 एकड़ भूमि पर कराए गए है। यहां ब्रज थीम पर आधारित कालिया नाग, गोवर्धन पर्वत, मोर, शंख, मण्डाला, जीआरसी और सेंड स्टोन जाली, पिलर, माखन मटका, स्टोन फाउंटेन, स्टोरी पैनल और महाभारत में कौरवों व पाण्डवों के बीच हुए कुरुक्षेत्र युद्ध आदि को प्रतीकात्मक संरचनाओं के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है। इसके अतिरिक्त तुलसी वाटिका भी विकसित की गई है। इसके तहत तुलसी की विभिन्न प्रजाति के पौधे जैसे रामा तुलसी, श्यामा तुलसी, वागा तुलसी, श्वेता तुलसी और विमला तुलसी आदि पौधे रोपित किए गए है।

 

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