बिजली जीवन का मौलिक अधिकार, टोरंट पाॅवर 45 दिन में दे कनेक्शन

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जिला उपभोक्ता आयोग प्रथम ने परिवादी के पक्ष में सुनाया महत्वपूर्ण फैसला

45 दिनों में कनेक्शन न देने बिजली कंपनी को देना होगा 2 लाख का हर्जाना

आगरा। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग-प्रथम ने बिजली उपभोक्ता के हित में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए 45 दिनों के अंदर टोरंट पाॅवर लिमिटेड को कनेक्शन देने के आदेश दिए। निर्धारित अवधि में कनेक्शन न देने पर विद्युत वितरण कम्पनी पर लगाया दो लाख का हर्जाना। आयोग ने स्पष्ट किया है कि बिजली का कनेक्शन प्राप्त करना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन जीने के अधिकार का हिस्सा है।

नगला बाल चंद स्थित लक्ष्मी स्टेट निवासी परिवादी राज कुमार भारतीय सेना से सेवानिवृत्त सूबेदार हैं। उन्होंने नए विद्युत कनेक्शन के लिए आवेदन किया था। इसके लिए आवश्यक प्रोसेसिंग फीस, सर्वे शुल्क, सिक्योरिटी डिपॉजिट और सर्विस लाइन चार्जेस (कुल 4,323) जमा किए थे, जिसके बाद उन्हें सर्विस कनेक्शन संख्या 705182382 आवंटित कर दिया गया।

परिवादी के भुगतान के बावजूद टोरेन्ट पावर ने कनेक्शन चालू करने से मना कर दिया। कंपनी का तर्क था कि जिस क्षेत्र में कनेक्शन मांगा गया है, वहां बिल्डर द्वारा विद्युतीकरण (इलेक्ट्रीफिकेशन) नहीं कराया गया है और उत्तर प्रदेश विद्युत आपूर्ति संहिता 2005 के क्लॉज 4.9 के तहत जब तक बिल्डर भारी शुल्क (लगभग 48 लाख से 58 लाख) जमा नहीं करता, तब तक व्यक्तिगत कनेक्शन नहीं दिया जा सकता। इस पर परिवादी ने उपभोक्ता आयोग में वाद दाखिल किया। आयोग के अध्यक्ष न्यायाधीश सर्वेश कुमार और सदस्य राजीव सिंह ने मामले की सुनवाई करते हुए पाया कि शुल्क जमा करने और कनेक्शन नंबर आवंटित होने के बाद परिवादी उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के तहत उपभोक्ता की श्रेणी में आता है। परिवादी ने साक्ष्य पेश किए कि उसके घर से मात्र 8-10 मीटर की दूरी पर बिजली का डिस्ट्रीब्यूशन बॉक्स लगा है और आसपास के घरों में पहले से ही कनेक्शन संचालित हैं। आयोग ने माना कि जान बूझकर बिल्डर का आधार बनाकर बिजली आपूर्ति रोकना सेवा में कमी है। आयोग ने दिल्ली उच्च न्यायालय के एक पूर्व निर्णय का हवाला देते हुए कहाकि बिजली अस्तित्व के लिए मौलिक अधिकारों में से एक है। किसी भी नागरिक से बिजली जैसी बुनियादी आवश्यकताओं के बिना रहने की उम्मीद नहीं की जा सकती।

आयोग ने परिवादी के पक्ष में निर्णय सुनाते हुए टोरेन्ट पावर कम्पनी को 45 दिनों के भीतर स्वीकृत कनेक्शन से बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कराने के आदेश दिए। साथ ही साथ ही निर्धारित समय में कनेक्शन नहीं देने पर विद्युत वितरण कम्पनी परिवादी को दो लाख रुपये मानसिक क्षतिपूर्ति के रूप में 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ भुगतान करेगी। इसके अलावा कंपनी को वाद व्यय के रूप में दस हजार रुपये भी देने के आदेश किए।

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