राष्ट्रकथा को व्यवसाय नहीं, सेवा और साधना बनाएंः ऋतेश्वर महाराज

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आगरा के सेमरा गांव में विराट हिन्दू सम्मेलन को किया सम्बोधित

कहा, भारतवासियों को अपनी भाषा और संस्कारों पर गर्व होना चाहिए

आगरा। आनंदम धाम पीठ के पीठाधीश्वर ऋतेम्बर महाराज ने कहाकि राष्ट्रकथा को व्यवसाय नहीं बल्कि सेवा और साधना बनाए रखें। उन्होंने कहाकि चीन, जर्मनी और जापान की तरह हमें भी अपनी भाषा और संस्कारों पर गर्व करना चाहिए। उक्त विचार पीठाधीश्वर महाराज ने रविवार को सेमरा गांव में आयोजित विराट हिन्दू सम्मेलन में व्यक्त किए।

विराट हिंदू सम्मेलन में बडी संख्या में लोगों की भीड उमडी। ऋतेश्वर महाराज ने अपने सम्बोधन में जहां हिंदुत्व और राष्ट्र जागरण का संदेश दिया। वहीं देश की संस्कृति और संस्कारों को अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहाकि मोबाइल में आलिया भट्ट की फोटो लगाने की जगह अपने माता-पिता की तस्वीर लगाएं। संघ के शताब्दी वर्ष को हिंदू जागरण का ऐतिहासिक अवसर बताते हुए ऋतेश्वर महाराज ने वर्ग भेद मिटाकर समाज में समरसता और एकता पर जोर दिया। रामराज्य को राष्ट्र और समाज के लिए आदर्श मॉडल बताया। युवाओं में हिंदुत्व और राष्ट्र के प्रति जागरण को समय की जरूरत बताया। उन्होंने कहाकि जागृत युवा ही राष्ट्र, सनातन और समाज का भविष्य सुरक्षित करेगा।

इससे पहले ऋतेश्वर महाराज ने कमला नगर में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि युवा शिक्षा के साथ विद्या भी लें। उसे शिक्षार्थी के साथ विद्यार्थी बनने की जरूरत है। सनातन संस्कृति को बचाए रखने और जीवन पद्धति को उच्च बनाने के लिए विद्या की आवश्यकता है।

उन्होंने कहाकि देश के युवाओं में साधु, संत और ऋषियों का रक्त है। वह राष्ट्र को प्रथम मानकर कार्य करते हैं। उनकी सोच निर्माण करने वाली है। उनकी जीवन पद्धति में सनातन है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक की शताब्दी वर्ष में जगह-जगह विराट हिंदू सम्मेलनों के आयोजन किया जा रहे हैं। उनमें हिंदुओं को जाति, भाषा और प्रांतीय भेदभाव को खत्म कर संगठित होने के लिए जागृत किया जा रहा है। युवाओं को इतिहास से सीखने की जरुरत है, जिसने नहीं सीखा वह समाज खंडित हुए है। राष्ट्र कथा का आयोजन भी युवाओं में राष्ट्र और सनातन के सर्वोपरि मानकर कार्य करने के लिए किया गया था।

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