गुब्बारे की तरह फूल गई थी दिमाग की नस, बिना चीरा लगाए बचाई मरीज की जान

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उजाला सिग्नस रेनबो हॉस्पिटल के डॉ तरुणेश और विजयवीर ने की सफल सर्जरी

आगरा। ब्रेन एन्यूरिज्म पीड़ित की उजाला सिग्नस रेनबो हॉस्पिटल में जटिल सर्जरी कर जान बचाई गई। मरीज को बेहोशी की हालत में अस्पताल लाया गया था। जांच में पता चला कि दिमाग की एक नस गुब्बारे (एन्यूरिज्म) की तरह फूल गई है जिससे दिमाग में खून बह रहा था। अस्पताल में एंडोवास्कुलर कॉइलिंग तकनीक से इलाज का यह तीसरा केस है। इलाज के बाद मरीज अब स्वस्थ है।

मरीज को बचाने के लिए डॉ. तरुणेश शर्मा और डॉ. विजयवीर सिंह की टीम ने सिर में चीरा लगाने के बजाय एंडोवास्कुलर कॉइलिंग पद्धति अपनाई। इसके तहत कमर की एक धमनी के जरिए एक बारीक कैथेटर (ट्यूब) को फूली हुई नस (एन्यूरिज्म) तक पहुंचाया गया। इसके माध्यम से एन्यूरिज्म के अंदर विशेष प्लेटिनम की कुंडलियां (कॉइल) भर दी गईं, ताकि उसमें रक्त प्रवाह रुक जाए। एन्यूरिज्म का आकार 1.5 सेंटीमीटर था।

पोस्ट-ऑपरेटिव केयर और त्वरित रिकवरी

इस प्रक्रिया के बाद रोगी को आईसीयू में लगातार 24 घंटे निगरानी में रखा गया। डॉक्टरों ने दवाओं के माध्यम से दिमाग की नसों को सिकुड़ने से बचाया। दरअसल अत्यधिक रक्त स्राव से नसों के सिकुड़ने का खतरा रहता है। डॉ. तरुणेश शर्मा के अनुसार, इस तकनीक में जोखिम कम है। रोगी को कम दर्द होता है और रिकवरी पारंपरिक सर्जरी की तुलना में अधिक तेजी से होती है।

सर्दियों में बढ़ जाता है खतरा

डॉक्टर तरुणेश ने बताया कि उच्च रक्तचाप, धूम्रपान, अत्यधिक तनाव, शराब का सेवन और आनुवंशिकता ब्रेन एन्यूरिज्म के प्रमुख कारण हैं। खासतौर पर सर्दियों में नसों के सिकुड़ने और रक्तचाप में उतार-चढ़ाव के कारण एन्यूरिज्म के फटने का खतरा बढ़ जाता है।

ये हैं चेतावनी के संकेत

डाॅ. तरुणेश ंने बताया कि अचानक बहुत तेज सिरदर्द (जैसे सिर में अब तक का सबसे भयानक दर्द), उल्टी आना, दौरे पड़ना, गर्दन अकड़न, धुंधला दिखाई देना या चेतना में कमी जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत किसी न्यूरोसर्जन या नजदीकी अस्पताल से संपर्क करना चाहिए। समय पर इलाज जान बचा सकता है।

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