कांग्रेस का आरोप, महिला आरक्षण के नाम पर मोदी बहा रहे घडियाली आंसूः
नयी दिल्ली। कांग्रेस ने कहाकि भाजपा हमेशा महिलाओं को आरक्षण देने के खिलाफ रही है और यही वजह है कि इस बार उसने महिला आरक्षण की आड़ में परिसीमन लाने का षड्यंत्र किया, जिसके कारण संसद में पेश संविधान संशोधन विधेयक गिर गया और भाजपा को मुंह की खानी पड़ी।
पार्टी ने कहाकि भाजपा शुरू से ही महिलाओं को आरक्षण नहीं देना चाहती है। वह हमेशा महिला आरक्षण के विरुद्ध रही है और यही कारण था कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी 1990 में महिलाओं को आरक्षण देने के लिए संविधान संशोधन विधेयक लेकर आए थे, तो भाजपा ने इसका विरोध किया था, जिसके कारण वह विधेयक संसद में पारित नहीं हो सका था। कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने रविवार को यहां पार्टी मुख्यालय पर संवाददाता सम्मेलन में कहाकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी डरे हुए हैं, इसलिए उन्होंने राष्ट्र के नाम शनिवार को 29 मिनट के संबोधन में 58 बार, यानी लगभग हर 30 सेकंड में कांग्रेस का नाम लिया। इससे साफ है कि मोदी महिला आरक्षण की आड़ में परिसीमन के अपने कथित षड्यंत्र के विफल होने के कारण देश के नाम संबोधन के दौरान घड़ियाली आंसू बहा रहे थे।
उन्होंने कहाकि मोदी को संविधान संशोधन विधेयक गिरने पर दुखी होने की बजाय 543 लोकसभा सीटों के आधार पर महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था करनी चाहिए और कांग्रेस इस व्यवस्था का पूरी तरह समर्थन करेगी। उनका कहना था कि मौजूदा 543 सीटों में से 181 सीटें महिलाओं को दे दीजिए इसमें रोड़ा मत बनिए।
कांग्रेस प्रवक्ता ने प्रधानमंत्री पर महिलाओं के प्रति असंवेदनशील रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहाकि देश में जहां भी महिलाओं के साथ अत्याचार होता है, वहां मोदी कुछ नहीं बोलते। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी ने कांग्रेस की शीर्ष नेता सोनिया गांधी के लिए ‘कांग्रेस की विधवा जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर महिलाओं का अपमान किया है। उन्होंने कहाकि महिला आरक्षण की बात करने वाली भाजपा को यह याद रखना चाहिए कि जब राजीव गांधी के शासनकाल में महिला आरक्षण विधेयक लाया गया था, तब भाजपा ने इसके खिलाफ मतदान किया था। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भाजपा शासन में महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों में बढ़ोतरी हुई है। पार्टी के अनुसार, ऐसे मामलों की संख्या 4 लाख से अधिक हो गई है और दुष्कर्म के मामले भी लगातार बढ़ रहे हैं। कांग्रेस ने यह भी कहाकि भाजपा के 1600 से अधिक विधायकों में केवल 167 महिलाएं हैं। देश के कई राज्यों में भाजपा की सरकार होने के बावजूद केवल एक राज्य में ही महिला मुख्यमंत्री है। पार्टी का कहना है कि इससे स्पष्ट है कि भाजपा महिलाओं के प्रति संवेदनशील नहीं है और यही कारण है कि उसे संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने में संसद में असफलता का सामना करना पड़ा।
