यूपी की नई आबकारी नीति को केबिनेट की मंजूरी, 71278 करोड की कमाई का लक्ष्य रखा
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश की नई आबकारी नीति 2026-27 को औपचारिक स्वीकृति दे दी गई है। प्रदेश सरकार ने इस नई नीति के माध्यम से राजस्व संग्रह में ऐतिहासिक वृद्धि का खाका तैयार किया है।
सरकार ने आगामी वित्तीय वर्ष में आबकारी विभाग से 71,278 करोड़ रुपये के राजस्व का लक्ष्य निर्धारित किया है, जो पिछले वर्ष के मुकाबले काफी अधिक है। इस नीति का मुख्य उद्देश्य अवैध शराब की बिक्री पर लगाम लगाना, व्यापार में पारदर्शिता लाना और प्रदेश के खजाने को मजबूत करना है।
शराब दुकानों के नवीनीकरण और आवंटन की नई व्यवस्था
नई आबकारी नीति के तहत सरकार ने शराब की दुकानों के आवंटन की प्रक्रिया को और अधिक व्यवस्थित किया है। अब जो मौजूदा दुकानदार नियमों का पालन कर रहे हैं और जिनका रिकॉर्ड साफ है, उन्हें अपनी दुकानों के नवीनीकरण का अवसर दिया जाएगा। इसके लिए नवीनीकरण शुल्क में मामूली बदलाव किए गए हैं। वहीं, जिन दुकानों का नवीनीकरण नहीं होगा, उनके लिए ई-लॉटरी के माध्यम से निष्पक्ष आवंटन प्रक्रिया अपनाई जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे सिंडिकेट और गुटबाजी पर लगाम लगेगी।
राजस्व बढ़ाने के लिए शुल्क ढांचे में बदलाव
योगी सरकार ने 71,278 करोड़ रुपये के भारी-भरकम लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए लाइसेंस शुल्क और परमिट फीस में वृद्धि की है। देशी, विदेशी शराब और बीयर की दुकानों के वार्षिक लाइसेंस शुल्क में 10ः से 15 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की जा सकती है। इसके अलावा, मॉडल शॉप्स और बार के लाइसेंस नियमों को भी सरल बनाया गया है ताकि निवेश को प्रोत्साहन मिले। सरकार ने नई नीति में यह सुनिश्चित किया है कि राजस्व बढ़ाने के साथ-साथ उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण उत्पाद ही मिलें।
अवैध शराब पर नकेल और डिजिटल ट्रैकिंग
नई नीति में अवैध शराब के निर्माण और तस्करी को रोकने के लिए ट्रैक एंड ट्रेस प्रणाली को और अधिक मजबूत करने का प्रावधान है। अब शराब की हर बोतल पर क्यूआर कोड अनिवार्य होगा, जिससे उसके निर्माण से लेकर बिक्री तक की पूरी जानकारी डिजिटल रूप से उपलब्ध रहेगी। इसके अतिरिक्त, आबकारी विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि वे पड़ोसी राज्यों से होने वाली शराब की तस्करी को रोकने के लिए चेकपोस्ट पर सख्ती बढ़ाएं।
पर्यटन और उद्योगों को बढ़ावा देने का प्रयास
कैबिनेट ने नई नीति में पर्यटन स्थलों और होटलों के लिए आबकारी नियमों में कुछ ढील दी है। विशेष रूप से हेरिटेज होटलों और औद्योगिक क्षेत्रों के पास स्थित क्लबों के लिए बार लाइसेंस की प्रक्रिया को आसान बनाया गया है। सरकार का विजन है कि इससे न केवल राजस्व बढ़ेगा बल्कि पर्यटन क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
