उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची पर आपत्तियों की तारीख 6 मार्च तक बढ़ी, 10 अप्रैल को आएगी फाइनल लिस्ट

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची को पारदर्शी और सटीक बनाने का अभियान युद्ध स्तर पर चल रहा है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि राज्य में नए मतदाताओं के जुड़ने का सिलसिला तेज हो गया है। आयोग का पूरा ध्यान उन लोगों पर है जिनका नाम अभी तक सूची में नहीं है या जिनकी एंट्री में तकनीकी विसंगतियां पाई गई हैं।

फॉर्म-6 के आवेदनों में भारी उछाल

अधिकारी ने जानकारी दी कि अब तक फॉर्म-6 के अंतर्गत कुल 37,80,414 आवेदन प्राप्त हुए हैं। यह संख्या लगातार बढ़ रही है क्योंकि बड़ी संख्या में ऐसे लोग सामने आ रहे हैं जिनके नाम पहले सूची में दर्ज नहीं थे। वहीं, मतदाता सूची से नाम कटवाने या विरोध के लिए फॉर्म-7 के कुल 82,684 आवेदन आए हैं। जो भारतीय नागरिक विदेश में रह रहे हैं, उनके लिए फॉर्म-6। भरकर नाम जुड़वाने की सुविधा दी गई है।

मैपिंग में पकड़ी गईं विसंगतियांः दायरे में आए 1 करोड़ 4 लाख लोग

गण़ना फॉर्म प्रक्रिया के दौरान लगभग 1 करोड़ 4 लाख लोग ऐसे पाए गए हैं जिनकी प्रविष्टियों में तार्किक विसंगतियां थीं। इस कारण उन्हें फिलहाल सूची में शामिल नहीं किया गया है। विभाग इन सभी मामलों की गहनता से जांच कर रहा है ताकि केवल पात्र लोग ही सूची का हिस्सा बनें।

3.26 करोड़ लोगों को नोटिस, प्रक्रिया तेज

विभिन्न विसंगतियों और सत्यापन के लिए कुल 3 करोड़ 26 लाख मतदाताओं को नोटिस भेजे जाने हैं। अब तक 2 करोड़ 37 लाख नोटिस जनरेट किए जा चुके हैं। इनमें से 86 लाख नोटिस मतदाताओं को वितरित किए जा चुके हैं। 30 लाख 30 हजार मतदाताओं की सुनवाई की प्रक्रिया भी पूरी की जा चुकी है।

दावा-आपत्ति की अवधि बढ़ी, 10 अप्रैल को प्रकाशन

मतदाताओं की सुविधा को देखते हुए आयोग ने दावा-आपत्ति दर्ज करने की समय सीमा को एक माह बढ़ाकर 6 मार्च तक कर दिया है। मैपिंग और नोटिस से जुड़ी सभी प्रक्रियाओं को 27 मार्च तक हर हाल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद, सभी संशोधनों के साथ अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 10 अप्रैल को किया जाएगा।

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