इटावा में नीम के पेड में दिखे भगवान, आस्था का उमड रहा सैलाब

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इटावा। उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के जसवंतनगर तहसील के जलपोखरा गांव में आगरा हाइवे के किनारे स्थित एक नीम का पेड़ इन दिनों चर्चा और आस्था का केंद्र बना हुआ है। भगवान मान कर नीम के पेड़ से निकलने वाले रस का स्वाद लेने हर कोई दौड़ा चला आ रहा है। इस पेड़ की पूजा करने के लिए बड़ी संख्या में हजारों की संख्या में श्रद्धाभाव से आसपास के लोग जमा हो रहे हैं। स्थानीय लोगों की ओर से ऐसा दावा किया जा रहा है कि इस पेड़ से एक ऐसे पदार्थ का रिसाव हो रहा है जो कहीं ना कहीं नारियल के पानी जैसा महसूस हो रहा है और जिससे इंसानी शरीर में खुजली और दर्द जैसी बीमारियों में राहत मिल रही है।

स्थानीय लोग भगवान के चमत्कार को मान करके यहां पूजा अर्चना करने के लिए न केवल पहुंच रहे हैं बल्कि चढ़ौती चढ़ाने में भी जुटे हुए दिख रहे हैं। आसपास से जुड़ने वाली महिलाएं यहां पर गाना बजाने ओर डांस करने में भी जुटी हुई नजर आ रही है। स्थानीय नागरिक धर्मेंद्र शास्त्री ऐसा दावा करते हैं कि करीब एक पखवाड़े पहले से शुरू हुआ यह रिसाव दूध जैसा दिखाई दे रहा है और इसका सेवन करने पर नीम जैसी कड़वाहट का एहसास नहीं है लेकिन यह रस कहीं ना कहीं नारियल के पानी जैसा महसूस होता हुआ दिख रहा है। जो लोग यहां पर श्रद्धा भाव से पूजा अर्चना करने के लिए पहुंच रहे हैं वह नीम के पेड़ से निकलने वाले इस रस को हर हाल में चख रहे हैं।
नीम के पेड़ के चमत्कार को सुनने के बाद जो भी यहां पहुंच रहा है वो कही ना कही कुछ दान देकर जरूर जा रहा है। महिलाएं बूढ़े बच्चे हर कोई इस नीम के पेड़ के दर्शन करने के लिए पहुंचता हुआ दिखाई दे रहा है।

कृषि विभाग के उप कृषि अधिकारी आरएन सिंह ऐसा मानते हैं कि नीम का पेड़ कहीं ना कहीं इंसानों के लिए किसी भी तरह से मुफीद होता है लेकिन यह बदलाव तकनीकी तौर पर पानी के प्रभाव के बढ़ने के चलते हुआ है जैसे-जैसे तापमान में वृद्धि होगी वैसे ही नीम के पेड़ से रस का प्रभाव घटना शुरू हो जाएगा। उनका कहना है कि लोगों की आस्था कब किस से जुड़ जाए यह नहीं कहा जा सकता है। नीम का पेड़ वैसे भी इंसानी सेहत के लिए बेहद मुफीद माना जाता है उसकी पत्ती, छाल और रस सब कुछ इंसानी सेहत के लिए फायदेमंद होता है। जिस तरह से नीम के पेड़ से रस का निकालना लगातार जारी बना हुआ है वह नीम के पेड़ में बढ़ते हुए पानी का प्रभाव माना जा रहा है यह सब गर्मी के असर के बाद कम होना शुरू हो जाएगा। जिस स्थान पर नीम का पेड़ लगा हुआ है पास में वही एक ईंट का भट्टा भी बना हुआ है। नीम के पेड़ से रिसाव सबसे पहले ईंट भट्टे पर काम करने वाले मजदूर ने ही देखा है।

इसके बाद स्थानीय लोगों को इस बारे में जानकारी मिली है और लोगों का यहां पर जमावड़ा शुरू हो गया है। स्थानीय लोगों से जब इस बारे में यह जानकारी की गई है कि यह कोई साजिश तो नहीं है तो स्थानीय लोगों का ऐसा कहना है कि पेड़ में किसी तरह की कोई साजिश कर पाना संभव नहीं है। प्रतिदिन कम से कम 7 लीटर के आसपास रस का रिसाव पेड़ से हो रहा है जिसको बर्तन में भरकर के यहां पहुंचने वाले लोगों के बीच में बांटा जा रहा है।

 

 

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