मायावती ने भी उठाई बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग

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चुनाव सुधारों पर मायावती तीन अहम सुधारों को भी रखा

लखनऊ। संसद में चुनाव सुधारों को लेकर जारी चर्चा के बीच बसपा प्रमुख माया वती ने चुनावी प्रणाली की खामियों को दूर करने के लिए तीन बड़े सुधारों की वकालत की है। उन्होंने कहाकि लोकतंत्र की मजबूती के लिए मतदाता सूची की सही और व्यापक तैयारी, उम्मीदवारों के आपराधिक इतिहास की अनिवार्य पार दर्शिता और ईवीएम की जगह बैलेट पेपर व्यवस्था की वापसी आवश्यक है।

मायावती ने एक्स पर लिखा कि पूरे देश में एसआईआर प्रक्रिया के माध्यम से मतदाता सूची तैयार की जा रही है, जिसका बसपा विरोध नहीं करती, लेकिन उन्होंने यह भी जोड़ा कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और संशोधन की प्रक्रिया तय समय सीमा के कारण पूरी नहीं हो पाती, जिससे लाखों पात्र मतदाता अपने वोट के अधिकार से वंचित हो जाते हैं। उन्होंने बीएलओ पर अधिक दबाव होने और जांच में लापरवाही की शिकायतें आने का उल्लेख किया। बसपा प्रमुख ने सुझाव दिया कि सूची संशोधन की समय सीमा बढ़ाई जाए और प्रक्रिया को ईमानदारी व पारदर्शिता के साथ पूरा कर यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी पात्र मतदाता का नाम सूची से बाहर न रह जाए।

ईवीएम पर सवाल उठाते हुए मायावती ने कहाकि चुनाव के दौरान और उसके बाद ईवीएम की विश्वसनीयता को लेकर संदेह जताए जाते रहे हैं। वीवीपैट पर्चियों की गिनती और मतों में मेल न होने पर विवाद और बढ़ जाता है। उन्होंने फिर दोहराया कि बैलेट पेपर की प्रणाली पूरी तरह पारदर्शी होती है और इसमें किसी तरह की शंका की गुंजाइश नहीं रहती। यदि बैलेट पेपर से मतदान कराया जाए तो हर वोट की गिनती और सत्यापन सुनिश्चित हो सकेगा।

प्रत्याशियों के आपराधिक इतिहास का मुद्दा भी गंभीरता से उठाते हुए मायावती ने कहाकि उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के बावजूद कई राजनीतिक दल अपने उम्मीदवारों के खिलाफ दर्ज मामलों की जानकारी सार्वजनिक करने से बचते हैं। ऐसे में नामांकन की जांच के दौरान जब नए तथ्य सामने आते हैं तो दोष चुनाव आयोग पर मढ़ दिया जाता है। मायावती ने कहाकि अपराधियों को टिकट देने वाली पाटिर्यों पर कानूनी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और उनके खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान होना चाहिए। साथ ही, प्रत्याशियों के आपराधिक रिकॉर्ड को अखबारों और वेबसाइटों पर प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए, ताकि मतदाता सही जानकारी के साथ निर्णय ले सकें।

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