आजम खां और बेटे अब्दुल्ला को 7-7 साल की सजा, पहुंचे जेल

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बिस्किट के 2 पैकेट लेकर जेल गए आजम खां

रामपुर। सपा नेता आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला को फिर 7-7 साल की सजा हुई है। रामपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट ने फर्जी पैन कार्ड मामले में सोमवार को दोनों को दोषी करार दिया। फैसले के तुरंत बाद कोर्ट में ही पुलिस ने बाप- बेटे को हिरासत में ले लिया। दोनों को कड़ी सुरक्षा में कोर्ट से एक किमी दूर गाड़ी से रामपुर जेल ले जाया गया। कोर्ट ने दोनों पर 50-50 हजार का जुर्माना भी लगाया।

आजम पुलिस की बोलेरो से जेल के बाहर उतरे तो एक हाथ में चश्मे का केस, दो पैकेट बिस्किट थे। फिर अब्दुल्ला गाड़ी से उतरा, उसके हाथ खाली थे। आजम के साथ उनका बड़ा बेटा अदीब भी पीछे-पीछे गाड़ी से जेल के गेट तक पहुंचा। उसने पिता आजम के कान में कुछ कहा। अदीब ने भाई अब्दुल्ला को गले लगाया तो दोनों भावुक हो गए। आजम खां ने जेल जाने से पहले कहाकि कोर्ट का फैसला है, कोर्ट ने गुनहगार समझा तो सजा सुनाई है। आजम 23 सितंबर को ही सीतापुर जेल से रिहा हुए थे।

आजम खान 2017 में अखिलेश सरकार में नगर विकास मंत्री थे। उन्होंने अपने रसूख के दम पर लखनऊ नगर निगम से बेटे का फर्जी जन्म प्रमाण पत्र (बर्थ सर्टिफिकेट) बनवाया। उसी के आधार पर फर्जी पैन कार्ड बनवाकर अब्दुल्ला को चुनाव लड़वाया था। इस केस का ट्रायल एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट कोर्ट में चल रहा था। इसमें दोनों पक्षों की ओर से बहस पूरी हो चुकी थी। कोर्ट में सुनवाई के दौरान वादी आकाश सक्सेना के वकील संदीप सक्सेना ने तर्क दिया कि अब्दुल्ला आजम के साथ उनके पिता भी दोषी हैं। आजम पर आरोप लगा कि उनके इशारे पर ही दोनों पैन कार्ड का अब्दुल्ला ने समय-समय पर अलग-अलग इस्तेमाल किया। सोमवार दोपहर बाद आजम खान और अब्दुल्ला आजम कोर्ट में पेश हुए। एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट कोर्ट शोभित बंसल ने आजम और उनके बेटे अब्दुल्ला को धोखाधड़ी में दोषी करार दिया। रामपुर कोर्ट का यह फैसला आजम के खिलाफ दर्ज 104 मुकदमों में से एक है। अब तक अदालत 11 मामलों में फैसला सुना चुकी है। इनमें से 6 मामलों में आजम को सजा हो चुकी है। वहीं, 5 मामलों में उन्हें बरी किया गया। 2 महीने पहले ही सभी केस में जमानत मिलने के बाद आजम सीतापुर जेल से बाहर आए थे। अब फिर से जेल पहुंच गए। वहीं, आजम के जेल जाने के बाद अखिलेश यादव ने कहाकि सत्ता के गुरूर में जो नाइंसाफी और जुल्म की हदें पार कर देते हैं। वो खुद एक दिन कुदरत के फैसले की गिरफ्त में आकर एक बेहद बुरे अंत की ओर जाते हैं। सब, सब देख रहे हैं।

 

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